राजा सागर की पत्नी केशनी की कथा (भाग -2) | जय गंगा मैया कथा
Bharat Ki Amar Kahaniyan
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राजा सागर की पत्नी केशनी की कथा (भाग -2) | जय गंगा मैया कथा
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सुमति के मन में उसकी दासी केशनी के प्रति शंका भर देती है। ऋषि वसिष्ठ रानी सुमति और राजा सगर को आशीर्वाद देते हैं और रानी सुमति के गर्भवती होने की बधाई भी देते हैं। प्रतिभा भी गर्भवती हो जाती है तो ऋषि वसिष्ठ जी उन्हें भी आशीर्वाद देते हैं। सुमति की दासी मानसी रानी सुमति को कहती है की तुम्हें राजकुमारी प्रतिभा का गर्भ गिरना होगा तभी आपका पुत्र ही राज्य का उत्तराधिकारी बनेगा। दासी सुमति से कहती है की आप राजकुमारी के गोद भराई में उसे विश पिलाकर गर्भ को नष्ट करने के लिए कहती है। प्रतिभा की गोद भराई की रस्म में दासी मानसी प्रतिभा को विश मिलाकर खीर खिला देती है। समस्तिपुर के राजा दासी मानसी से पूछता है की अब तक प्रतिभा का गर्भ नष्ट क्यों नहीं हुआ। दासी उन्हें बताती है की मैंने जो विश राजकुमारी प्रतिभा को दिया है वह धीरे धीरे काम करेगा यदि वह तभी असर करता तो आप पर शक जा सकता था। राजा सगर कपिल मुनि जी को अयोध्या में चलकर उन्हें आशीर्वाद देने के लिए कहते हैं। कपिल मुनि जी उनकी बात मान लेते हैं। समस्तिपुर का राजा और दासी सूर्यास्त होने का इंतज़ार कर रहे थे की कब प्रतिभा का गर्भ नष्ट हो। राजकुमारी प्रतिभा के पेट में दर्द शुरू हो जाता है और राज वैद्य आकर उन्हें बताते हैं की राजकुमारी का गर्भपात नहीं हुआ है लेकिन उनके पुत्र का जनम अभी होने वाला है। कपिल मुनि जी राजमहल में आते हैं और राजकुमार असमंजस को आशीर्वाद देते हुए समझाते हैं की आपको अपने पति। के कर्तव्य को पूर्ण करना चाहिए। राजकुमार असमंजस उनकी बात पर कहता है की आपके होते हमारा कभी भी अमंगल नहीं हो सकता। राजकुमारी एक बालक को जनम देती है जो मृत होता है यह समाचार सुन कर राजा सगर राजकुमारी के कक्ष में जाते हैं तो रानी केशनी दुःख में सुध खोए रहती हैं और राजा से कहती है की हमें युद्ध की तैयारी करनी चाहिए और काल से अपने पोते के प्रण वापस लाने होंगे। राजा सगर केशनी को समझाते हैं और कपिल मुनि जी के सामने अपने पौत्र को रख कर उनसे विनती करते हैं की कृपा करके आप इस बालक को पुनः जीवित कर दें। कपिल मुनि जी अपनी विद्या का इस्तेमाल कर उस बालक को पुनः जीवित कर देते हैं। राजा गुणवर्धन और दासी मानसी दोनों अंशुमन को उसके पहले जन्मदिन के दिन मारने की योजना बनाते हैं। गुणवर्धन की रानी अपने राज्य के सैनिक को वहाँ देख कर समझ जाती है की वह ज़रूर अंशुमन को मारने आयी है और वह बार बार सैनिक और अंशुमन की बीच आ जाती है। जैसे ही राजा गुणवर्धन का सैनिक अंशुमन पर वार करता है तो रानी उसे बचा लेती है राजा सगर के सैनिक उस हमलावर को मार देते हैं। राजा सगर और केशनी रानी का आभार प्रकट करते हैं। राजा गुणवर्धन को रानी समझाती है आप ऐसा पाप ना करे और अंशुमन को मारने का ख़याल अपने दिमाग़ से निकल दे तभी रानी सुमति के पेट में दर्द होना शुरू हो जाता है और दासी यह समाचार लेकर राजा गुणवर्धन और रानी सुमित्रा के पास आती है। सुमति बालक की जगह एक मांस के गोले को जनम देती हैं जिसे देख राजा सगर उसे नष्ट करने की आज्ञा देते हैं तो तभी उनके महा ऋषि वशिष्ठ वहाँ आकर उन्हें कहते हैं की ये निर्जीव नहीं है यह तुम्हारे 60 हज़ार पुत्र हैं मैं इनका निर्माण करूँगा। महा ऋषि वशिष्ठ उस मांस टुकड़े को 60 हज़ार पुत्रों में बदल देते हैं। राजा सगर अपने सभी पुत्रों का पालन पोषण करके बड़ा कर देते हैं और उन्हें गुरु वशिष्ठ जी के पास शिक्षा लेने के लिए भेजते हैं।
भारत की अमर कहानियाँ में आपको मिलती हैं ऐसी कथाएँ जो न केवल अनोखी हैं, बल्कि हमारी संस्कृति की अमूल्य धरोहर भी हैं। ये कहानियाँ शाश्वत हैं क्योंकि ये हमारे मन-मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं।
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