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क्या नारनौल में 750 साल पुरानी मेवाती तारीख़ छिपी है? The 750-Year-Old Mewati History! Mewat! Meo’s!

History of Mewat with Altaf Hussain

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क्या नारनौल में 750 साल पुरानी मेवाती तारीख़ छिपी है? The 750-Year-Old Mewati History! Mewat! Meo’s!

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History of Mewat with Altaf Hussain
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क्या एक गांव की रवायत, एक पुराना शिलालेख और फ़ारसी इतिहास की एक पंक्ति—मेवात की 700 साल पुरानी कहानी की कड़ियां जोड़ सकते हैं? कहानी शुरू होती है कांटी से। बुज़ुर्गों की रवायत के मुताबिक, करीब साढ़े सात सौ साल पहले राणा बशेसर ने इसे बसाया, जिसका पुराना नाम कनैहरी बताया जाता है। पुराने विवरणों में कांटी को मेव गांव के रूप में दर्ज किया गया है। फिर पहुंचते हैं नारनौल के पीर तुर्कमान पर। हरियाणा पुरातत्व विभाग के विवरण में 760 हिजरी/1357 ई. में Alam ख़ाँ मेवाती द्वारा परिसर के एक हिस्से के निर्माण का उल्लेख मिलता है। यानी 14वीं सदी में नारनौल की इस ऐतिहासिक इमारत पर मेवाती उपस्थिति का एक ठोस प्रमाण मिलता है। 1411 ई. में फ़ारसी इतिहास-स्रोत हमें बताते हैं कि नारनौल इक़लीम ख़ाँ और बहादुर नाहर के अधिकार में था। 1411–12 ई. के फ़ारसी विवरण याह्या बिन अहमद सिरहिंदी की तारीख़-ए-मुबारकशाही हमें बहादुर नाहर के परिवार, उनके उत्तराधिकारियों और मेवात की बदलती राजनीतिक स्थिति की अगली कड़ियों तक ले जाते हैं। अब इन कड़ियों को एक साथ देखिए—कांटी की मेव बस्ती → 1357 का Alam ख़ाँ मेवाती → पीर तुर्कमान Tomb → 1411 का बहादुर नाहर और इक़लीम ख़ाँ। क्या ये महज़ अलग-अलग घटनाएं हैं? या नारनौल और आसपास के इलाके में सदियों पुरानी मेवाती मौजूदगी और राजनीतिक प्रभाव की एक बड़ी कहानी की कड़ियां हैं? मेवाती तवारीख़ का सफ़र यहीं से शुरू होता है—गांवों की रवायत से, शिलालेखों से और फ़ारसी तारीख़ों से अपनी भूली हुई कहानी तलाशने का सफ़र। #mewati #mewatireel #mewativiral #historymatters #narnaulnews #haryana #HaryanaHeritage #meos #mewatisong #IndianHistory #history #viralpost