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आखिरी सांस के बाद 13 दिनों तक आत्मा के साथ क्या होता है? | गरुड़ पुराण

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आखिरी सांस के बाद 13 दिनों तक आत्मा के साथ क्या होता है? | गरुड़ पुराण

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आखिरी सांस के बाद 13 दिनों तक आत्मा के साथ क्या होता है? | गरुड़ पुराण #गरुड़पुराण #मृत्युकेबाद #आत्मा #यमलोक #वैतरणीनदी #यमदूत #चित्रगुप्त #कर्म #पुनर्जन्म #पितृलोक #श्राद्ध #पिंडदान #मोक्ष #सनातनधर्म #हिंदूधर्म मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है? क्या मृत्यु के बाद आत्मा तुरंत यमलोक पहुंच जाती है? गरुड़ पुराण में आत्मा की मृत्यु के बाद की यात्रा, यमदूत, विष्णुदूत, वैतरणी नदी, यमलोक, चित्रगुप्त, कर्मों का लेखा-जोखा, नरक, पुनर्जन्म और पितृलोक से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। इस वीडियो में हम गरुड़ पुराण में वर्णित आत्मा की यात्रा को विस्तार से समझने की कोशिश करेंगे। मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति क्या होती है, पिंडदान और श्राद्ध का क्या महत्व बताया गया है, वैतरणी नदी का वर्णन क्या है और कर्मों के आधार पर आत्मा के साथ क्या होता है—इन सभी विषयों पर चर्चा की गई है। साथ ही यह भी समझेंगे कि हिंदू दर्शन में कर्म, पुनर्जन्म, पितृलोक और मोक्ष को किस तरह देखा गया है और जीवन में हमारे कर्मों का महत्व इतना अधिक क्यों बताया गया है। यह वीडियो धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों में वर्णित विचारों को समझने के उद्देश्य से बनाया गया है। वीडियो पसंद आए तो Like करें, Channel को Subscribe करें और अपने परिवार व दोस्तों के साथ Share जरूर करें। धन्यवाद। 🙏 your query मृत्यु के बाद आत्मा मृत्यु के बाद क्या होता है आत्मा की यात्रा गरुड़ पुराण गरुड़ पुराण कथा गरुड़ पुराण में मृत्यु गरुड़ पुराण रहस्य यमलोक यमलोक की यात्रा वैतरणी नदी मृत्यु के बाद आत्मा कहाँ जाती है मृत्यु के बाद आत्मा कहाँ रहती है यमदूत विष्णुदूत चित्रगुप्त कर्मों का हिसाब पुनर्जन्म पितृलोक श्राद्ध पिंडदान पितृ पक्ष मोक्ष हिंदू धर्म सनातन धर्म मृत्यु का रहस्य आत्मा और पुनर्जन्म garud puran garuda purana garud puran katha garud puran rahasya mrityu ke baad kya hota hai mrityu ke baad atma atma ki yatra atma kahan jati hai yam lok yamalok garud puran death Disclaimer: इस वीडियो में गरुड़ पुराण एवं हिंदू धार्मिक परंपराओं में वर्णित मान्यताओं और कथाओं को जानकारी एवं आध्यात्मिक/शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य किसी धर्म, व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। मृत्यु के बाद की घटनाओं से संबंधित विषय धार्मिक एवं आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में न लिया जाए।