सागर में पीपल के पत्ते पर कृष्ण अंगूठा चूसते हुए दिखाया गया। इसका क्या रहस्य? VCD 666
अध्यात्म विद्या रहस्य
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सागर में पीपल के पत्ते पर कृष्ण अंगूठा चूसते हुए दिखाया गया। इसका क्या रहस्य? VCD 666
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"सागर में पीपल के पत्ते पर कृष्ण अंगूठा चूसते हुए दिखाया गया। इसका क्या रहस्य? क्या यह सब स्थूल बातें हैं?
दिखाते हैं प्रलय हो गई।" शास्त्रों में यह दिखाते हैं ना कि प्रलय हो गई। प्रलय अर्थात सब कुछ लीन हो गया। प्रकष्ट रूपेण सब लीन हो गया। कुछ भी बचा नहीं। "प्रलय होने के बाद फिर दिखाते हैं। सागर में पीपल के पत्ते पर कृष्ण आया।"शास्त्रों की जो भी बातें हैं अगर ऐसे ही झूठी हैं,तो भगवान के मुख से क्यों बोली जाती हैं? फिर कहते हैं शास्त्रों में भूसे में दाने के मिसल सच्चाई है। भूसा बहुत है, दाने थोड़े हैं। आटे में नमक मिसल सच्चाई है। इसका मतलब की भगवान बाप जो ब्रह्मा के मुख से बोलते हैं, भले शास्त्रों की कोई भी बात बोलते हैं। उसमें रहस्य छुपा हुआ है।
जैसे दिखाते हैं--प्रलय हो गई। क्या प्रलय होती है? प्रलय नहीं होती है। परंतु मन बुद्धि रूपी आत्मा परमात्मा बाप की याद में लीन हो जाती है। संकल्प-विकल्पों का जितना भी भंडार है वह सब खलास हो जाता है। फिर दिखाते हैं,कि पीपल के पत्ते पर कृष्ण आया। ये कौन से समय की बातें हैं? [ संगमयुग की ] संगम में प्रलय कैसे होती है? [ किसी ने कहा--एक आत्मा के लिए होती है।] सभी के लिए होनी है आगे पीछे। नंबरवार सब बीज रूपी स्टेज में जाने वाले हैं। बीज रूपी स्टेज में जाना माने सब खलास हो गया। आप मुए मर गई दुनिया,फिर शूटिंग शुरू होती है।
तो दिखाते हैं सागर में पीपल के पत्ते पर कृष्ण बड़ी मौज में अंगूठा चूसते हुए आया। तो ज़ब सब लीन ही हो गया तो पीपल का पत्ता कहां से आ गया? पीपल का पत्ता अर्थात शास्त्रों में लिखा है--" पीपल पात सरस मन डोला।" पीपल के पत्ते के समान मन डुलायमान है। तो मन के रूप में पार्ट बजाने वाली आत्मा कौन? [ जगदम्बा] वो तो पीपल के पत्ते पर आया। माना वो पीपल के पत्ते में प्रवेश किया। तो पीपल का पत्ता तो कोई दूसरा होगा ना! कृष्ण की आत्मा ने पीपल के पत्ते का आधार लिया। तो पीपल का पत्ता कौन?[जगदंबा] [ किसी ने कहा -राम वाली आत्मा] रामवाली आत्मा पीपल के पत्ते की तरह डुलायमान होती? अगर वही पीपल के पत्ते की तरह डुलायमान हो जाएगी , तो फिर निश्चय बुद्धि कौन बनेंगे? एक है ध्रुवतारा और बाकी सब है नंबरवार छोटा बड़ा चक्कर काटने वाले। तो ज्यादा से ज्यादा जो चक्कर काटने वाली आत्मा है, वो है कृष्ण की शोल और वो प्रवेश करती है। किसमें? पीपल के पत्ते में माना वो जिस आत्मा में प्रवेश करती है, वो आत्मा ज्ञान में बहुत ऊपर-नीचे होती है, बहुत डुलायमान होती है। और जो भी पत्ते होते हैं, वो उतना नहीं हिलते और पीपल का पत्ता यूँ फिर यूँ। पूरा ही डोल जाता है।
बाप कहते हैं ये नवैया हिलेगी-डुलेगी लेकिन डूबेगी नहीं। देखने वाले जो अनिश्चय बुद्धि होंगे उनको भी हिलाए देगी। लेकिन बाप के महावाक्यों ऊपर निश्चय बुद्धि होना चाहिए ना! कि ये नैया डूब नहीं सकती, हिलोरे कितने भी आवे परंतु यह नैया डूबेगी नहीं। तो दिखाते हैं पीपल के पत्ते पर कृष्ण आया। अभी बताओ ये कैसे हो सकता है? ऐसे हो सकता है कि कृष्ण की आत्मा पीपल के पत्ते की तरह जिसका मन डोलायमान होता है। ऊपर-नीचे होती है, जो आत्मा उसमें कृष्ण की शोल बड़े आराम से प्रवेश करके अपनी आत्मिक स्मृति का अंगूठा चूसती है।
तो बाप पूछते हैं यह कैसे हो सकता है? पीपल के पत्ते पर तो बालक डूब जावेगा। माना स्थूल बालक की बात नहीं है। यह तो आत्मा की बात है। और आत्मा तो पावरफुल है। पावरफुल आत्मा पीपल के पत्ते के मिसल डुलाईमान आत्मा में प्रवेश करती है। मनुष्य तो सब सत सत कहते रहते हैं,कि हां पीपल के पत्ते पर कोई बालक सागर में था और वह बालक बड़े आराम से लेटा हुआ था। बड़ी प्रलय तो होती नहीं है। कब? द्वापर के अंत में भी बड़ी प्रलय तो होती नहीं है।
यह भारत खंड तो अविनाशी है। इसका विनाश कभी
होता ही नहीं। सब खंड लीन हो जावेंगे। समुद्र के गर्त में समाए जावेंगे। लेकिन भारत खंड समुद्र के गर्त में समाएगा नहीं। ये अविनाशी खंड है। [37.30-45.26]
VCD:666 मुरली:-13-09-1967 व्याख्या :- 05-05-2007