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मन का भयंकर युद्ध: प्रसन्नचंद्र राजर्षि की अनोखी जैन कथा | भावों की शुद्धि से केवलज्ञान

JAIN SUTRA

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मन का भयंकर युद्ध: प्रसन्नचंद्र राजर्षि की अनोखी जैन कथा | भावों की शुद्धि से केवलज्ञान

262 просмотра · 11 дней назад
JAIN SUTRA
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जय जिनेंद्र! आज हम चर्चा नहीं, आज हम एक अत्यंत पावन और प्रेरणादायक कथा के बारे में जानेंगे - प्रसन्नचंद्र राजर्षि की कथा। यह कथा हमें सिखाती है कि हमारी आत्मा की उन्नति और पतन हमारे बाहरी दिखावे पर नहीं, बल्कि हमारे आंतरिक विचारों और भावों की शुद्धता पर निर्भर करता है। मुनिराज प्रसन्नचंद्र बाहर से तो घोर तपस्या में अडिग खड़े थे, लेकिन कानों में पड़े वचनों के कारण उनके मन में भयंकर वैचारिक युद्ध छिड़ गया। कैसे एक ही पल में उनके भाव सातवें नरक तक पहुँच गए और कैसे एक ही क्षण के सच्चे पश्चाताप ने उन्हें सीधे केवलज्ञान (मोक्ष) के परम धाम पहुंचा दिया? इस अद्भुत रहस्य को जानने के लिए वीडियो को अंत तक पूरा जरूर देखें। मुनिराज प्रसन्नचंद्र का कठिन कायोत्सर्ग तप और ध्यान सैनिकों की कड़वी बातें और मन में जागृत हुआ मानसिक कुरुक्षेत्र सम्राट श्रेणिक का प्रश्न और भगवान महावीर का चौंकाने वाला उत्तर सिर के स्पर्श से अचानक आया होश और पश्चाताप की अग्नि भावों की परम विशुद्धता से केवलज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति यदि आपको जैन धर्म की यह पावन और प्रेरक कहानी पसंद आई हो, तो कृपया हमारे चैनल को सब्सक्राइब कीजिएगा और फॉलो कीजिएगा ताकि ऐसी ही और भी सुंदर कथाएं हम आप तक लाते रहें। अपने परिवार और मित्रों के साथ इस ज्ञान को जरूर शेयर करें! धन्यवाद!