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भीमा कोरेगांव का सच: क्या वाकई यह 'जातिगत युद्ध' था? | कथा मंजरी | Caste and Discrimination

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भीमा कोरेगांव का सच: क्या वाकई यह 'जातिगत युद्ध' था? | कथा मंजरी | Caste and Discrimination

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आज 'कथा मंजरी' के इस वीडियो में हम इतिहास के एक ऐसे पन्ने को पलटने जा रहे हैं जिसे आधुनिक नैरेटिव में अक्सर तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता ह, और ये पन्ना है भीमा कोरेगांव का युद्ध। अक्सर यह दावा किया जाता है कि यह युद्ध केवल 'जातिगत संघर्ष' था, लेकिन ऐतिहासिक तथ्य कुछ और ही कहानी कहते हैं। इस वीडियो में हम जानेंगे: सच्चाई क्या है?: भीमा कोरेगांव का युद्ध वास्तव में अंग्रेजों और पेशवाओं के बीच 'तीसरे एंग्लो-मराठा युद्ध' का एक हिस्सा था। महारों का गौरवशाली इतिहास: छत्रपति शिवाजी महाराज के समय से ही महारों को सेना में उच्च स्थान प्राप्त था। शिवाजी के पुत्र ने उन्हें गाँव और ज़मीन भी दिए थे। मराठा छत्रपतियों (विशेषकर शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज) ने उनकी निष्ठा और वीरता के सम्मान में 'राजकीय सनद' के जरिए दी थीं.. महारों ने कौरवों के खिलाफ भी युद्ध लड़ा था, जिसकी चर्चा आज का इको-सिस्टम नहीं करता। एकजुट सेना: पेशवा की सेना में हर जाति के लोग शामिल थे और महार जाति के सैनिक दोनों ही पक्षों की ओर से लड़ रहे थे। ऐसे में इसे ब्राह्मण बनाम दलित का रंग देना ऐतिहासिक रूप से गलत है। रोहित पांडे वामपंथी नैरेटिव का खंडन करते हुए बता रहे हैं कि कैसे कुछ विचारधाराओं ने इस युद्ध का उपयोग समाज में नफरत फैलाने और ब्राह्मण-दलितों के बीच दरार पैदा करने के लिए किया... पेशवा की ताकत से घबराकर अंग्रेजों ने अफवाहों और धूर्तता का सहारा लिया, जिसे आज एक 'जीत' के झूठ के रूप में प्रचारित किया जाता है। The Bhima Koregaon war wasn't a caste conflict. From Shivaji Maharaj's era, Mahars held high military ranks and land grants. Rohit Pandey debunks leftist narratives, revealing how British deceit is now used to divide society and hide Maratha unity. #shivajimaharaj #castecensus #maratha