सर्व कार्यो में मिलेगी सफलता, सर्व सुखों की होगी प्राप्ति श्री सीताराम और हनुमान के इन स्तोत्रों से
Sandip Pandya
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सर्व कार्यो में मिलेगी सफलता, सर्व सुखों की होगी प्राप्ति श्री सीताराम और हनुमान के इन स्तोत्रों से
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हनुमत् कृत सीताराम स्तोत्र और हनुमदाचार्य (या पारंपरिक आचार्यों) कृत हनुमान स्तवन दोनों ही सनातन धर्म में अत्यंत प्रभावशाली और चमत्कारी माने गए हैं। हनुमान जी द्वारा रचित स्तोत्र जहाँ प्रभु श्री राम और माता सीता की युगल छवि की आराधना करता है, वहीं हनुमान स्तवन स्वयं संकटमोचन बजरंगबली की शक्तियों और गुणों को नमन करता है।
दोनों स्तोत्रों के विशिष्ट लाभ नीचे दिए गए हैं:
1. हनुमत् कृत सीताराम स्तोत्र (Hanumatkrit Sitaram Stotram) के लाभ
यह स्तोत्र स्वयं भगवान हनुमान जी द्वारा प्रभु श्री राम और माता जानकी की स्तुति में रचा गया है। इसके पाठ से मिलने वाले मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
• सकल मनोरथ सिद्धि: स्तोत्र की फलश्रुति (अंतिम श्लोक) के अनुसार, जो व्यक्ति प्रातः काल उठकर इसका पाठ करता है, उसकी सभी लौकिक और पारलौकिक इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
• शीघ्र मोक्ष (सद्यो विमुक्तिदम्): इस स्तोत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह साधक को तुरंत मानसिक बंधनों से मुक्त कर परम गति (मोक्ष) प्रदान करने वाला माना गया है।
• सुख-समृद्धि और पुण्य संपदा: इसके नियमित जप से घर में नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और अक्षय धन, ऐश्वर्य तथा पुण्य की प्राप्ति होती है।
• हनुमान जी की विशेष कृपा: चूंकि हनुमान जी को श्री सीताराम का नाम और रूप सबसे प्रिय है, इसलिए जो भक्त इस स्तोत्र का गान करता है, उस पर हनुमान जी की स्वतः ही असीम कृपा बरसती है।
2. हनुमान स्तवन (Hanuman Stavan) के लाभ
हनुमान स्तवन (जैसे "मनोजवं मारुततुल्यवेगं..." आदि श्लोकों का संग्रह) हनुमान जी के पराक्रम, बुद्धि और रामभक्ति को समर्पित है। इसके पाठ के लाभ निम्नलिखित हैं:
• भय और संकटों का नाश: यह स्तोत्र अज्ञात भय, भूत-प्रेत बाधा, बुरे सपनों और घबराहट को तुरंत दूर करता है। लंका को भयभीत करने वाले हनुमान जी का यह पाठ साधक को निर्भय बनाता है।
• बल, बुद्धि और विद्या की प्राप्ति: विद्यार्थी और ज्ञान की इच्छा रखने वालों के लिए यह विशेष फलदायी है। यह स्मरण शक्ति, मानसिक एकाग्रता और वाक्-सिद्धि (बोलने की कला) को बढ़ाता है।
• ग्रह दोषों से मुक्ति: शनिवार या मंगलवार को इसका पाठ करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और मंगल दोष के बुरे प्रभावों से राहत मिलती है।
• शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य: गंभीर रोगों, मानसिक तनाव और अवसाद (Depression) से जूझ रहे लोगों को इसके पाठ से अद्भुत आत्मबल और आरोग्य मिलता है।
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