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आध्यात्मिक चिंतन is live! ##जलझूलनी एकादशी पर आओ मिलकर राम नाम जाप करें।

आध्यात्मिक चिंतन

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आध्यात्मिक चिंतन is live! ##जलझूलनी एकादशी पर आओ मिलकर राम नाम जाप करें।

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आध्यात्मिक चिंतन
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श्रीविग्रह से कोटि-सूर्य और चंद्रमाओं जैसा मृदुल, अलौकिक प्रकाश प्रवाहित होता है, जो मन के सारे अंधकार और अज्ञान को एक क्षण में मिटा देता है। ​कमल-लोचन: उनके नयन नव-विकसित कमल की पंखुड़ियों के समान विशाल, करुणामयी और छलकती हुई कृपा से भरे हैं। उन आँखों में एक साथ अनंत वात्सल्य और पूरे ब्रह्मांड की नीरवता समाई हुई है। ​मंद मुस्कान: उनके अरुण (गुलाबी) ओष्ठों पर एक ऐसी मनमोहिनी और सहज मुस्कान बिखरी है, जो जीव के जन्मों-जन्मों के संताप और थकान को क्षण भर में हर लेती है। ​अलौकिक वेशभूषा व आभूषण ​पीतांबर एवं वस्त्र: प्रभु का दिव्य वेश (जैसे पीतांबर या श्वेत वस्त्र) बिजली की चमक की भांति ददीप्यमान है, जो उनके श्यामल या दिव्य वर्ण पर अत्यंत सुशोभित होता है। ​वनमाला एवं आभूषण: गले में गुंथी हुई वैजयंती माला और तुलसी की सुंगध चहुंओर व्याप्त है। मस्तक पर मुकुट, कानों में मकराकृत कुंडल और हाथों में कंकण प्रभु के सौन्दर्य को द्विगुणित करते हैं। ​चरण कमल: प्रभु के कोमल श्रीचरणों में ध्वज, वज्र और अंकुश जैसे शुभ चिह्न सुशोभित हैं। उन चरणों से बहती नूपुर की मधुर ध्वनि मन को स्थिर कर देती है। ​वातावरण और आनुभूतिक प्रभाव ​दिव्य सुगंध: संपूर्ण वातावरण में कस्तूरी, चंदन, केसर और तुलसी का एक ऐसा अपार सुगंधित प्रवाह होता है जो किसी लौकिक वस्तु में संभव नहीं। ​परम शांति और स्तब्धता: दर्शन के उस क्षण में काल (समय) मानो ठहर जाता है। मन की सारी चंचलता, चिंताएं और सांसारिक कामनाएं लुप्त हो जाती हैं, और केवल एक असीम आनंद तथा समर्पण का भाव ही शेष रह जाता है।