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Uda Devi story in Hindi | जय हो पासी समाज! | ऊदा देवी की मृत्यू कैसे हुई? | ‪@CHNNews‬

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Uda Devi story in Hindi | जय हो पासी समाज! | ऊदा देवी की मृत्यू कैसे हुई? | ‪@CHNNews‬

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1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की एक विशेषता यह भी है कि इसमें महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था. इस संग्राम में महिलाओं ने ना केवल आजादी के दीवाने क्रांतिकारियों की सहायक की भूमिका अदा की थी, बल्कि युद्ध में स्वयं अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया था. मिसाल के तौर पर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और अवध की शासक बेगम हजरत महल, जो खुद भी युद्ध में हिस्सा लेती थीं. इसी कड़ी में वीर पासी योद्धा वीरांगना ऊदा देवी पासी ने लखनऊ के सिकंदर बाग में अपनी साहस, वीरता और बलिदान की अमिट अमरगाथा इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित करा दी. सिकंदर बाग के युद्ध में वह ना केवल बहादुरी से लड़ीं, बल्कि मौत को गले से लगाने से पहले 32 अंग्रेज सैनिकों और अफसरों को मौत के घाट उतार  कर अपने पति मक्का पासी के बलिदान का बदला लिया. साथ ही अपने पराक्रम से अकेले दम पर ब्रिटिश सैनिकों को सिकंदर बाग में प्रवेश करने से काफी समय तक रोके रखा.आइए जानते हैैं पासी समाज की लक्ष्मीबाई ऊदा देवी का जीवन परिचय और उनके वीरता की अमर कहानी. ‪@CHNNews‬