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🔴LIVE:- 🎭 शिव रामलीला समिति, नई अनाज मंडी, रेवाड़ी 🎭 हरियाणा DAY 6

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🔴LIVE:- 🎭 शिव रामलीला समिति, नई अनाज मंडी, रेवाड़ी 🎭 हरियाणा DAY 6

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🔴LIVE:- ॥ जय श्री राम ॥ 🚩🙏 🎭 शिव रामलीला समिति, नई अनाज मंडी, रेवाड़ी 🎭 📢 🌺 सादर आमंत्रण 🌺 🙏 आप सभी धर्मप्रेमी सज्जनों को सूचित करते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि आज सायंकाल भगवान श्री गणेश जी का पूजन किया जाएगा तथा उसके पश्चात भक्तिमय नाटक “श्रवण कुमार” का मंचन किया जाएगा। 📅 दिनांक: 17 अक्टूबर 2026, मंगलवार ⏰ समय: रात्रि 8:15 बजे 📍 स्थान: नई अनाज मंडी, श्री शिव रामलीला समिति, रेवाड़ी 🙏 आप सभी सपरिवार पधारकर भगवान श्री गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त करें तथा श्रवण कुमार की मातृ-पितृ भक्ति पर आधारित प्रेरणादायक नाटक का आनंद लें। 🌸 आपकी गरिमामयी उपस्थिति सादर प्रार्थनीय है। 🌸 🚩 निवेदक: दीपक मंगला महासचिव शिव रामलीला समिति, नई अनाज मंडी, रेवाड़ी ॥ जय श्री राम ॥ 🙏🚩 Jatin Punia: #shyam #krishna #khatushyamji #shyambaba #jaishreeshyam #radheshyam #khatu #lakhdatar #khatushyambaba #kanha #khatushyam #khatunaresh #harekrishna #radheradhe #radhekrishna #radhe #babashyam #vrindavan #khatudham #radha #love #shyamsarkar #khatuwale #murlidhar #gopal #jai #khatushyamjitemple #madhav #jaishreekrishna #krishna Jatin Punia: #barsana #khatushyamjistatus #instagood #khatushyamstatus #jaishreeram #radharani #khatushyambhajan #shreenathji #sawariya #khatuji #ki #radhakrishna #bankebihari #god #lordkrishna #ji #shreekrishna #instagram #mahadev #instadaily #hari #devotional #mohan #motivation #haribol #krushna #shyampyare #photooftheday #iskcon #shreeshyam Jatin Punia: #khatushyamji #shyam #khatu #khatushyambaba #shyambaba #jaishreeshyam #khatushyam #khatunaresh #lakhdatar #krishna #khatuwale #khatushyamjitemple #khatudham #radheshyam #babashyam #khatushyamjis 🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️ 🚩🕉️श्रीरामचरितमानस के दिव्य प्रसंग 🚩🕉️अध्याय 15 : अयोध्या से वनगमन — जब राजमहल रो पड़ा 🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️ 🚩🕉️अयोध्या में अब वह सुबह आ चुकी थी, जिसका नागरिकों को बेसब्री से इंतजार था। लेकिन राजतिलक का उत्सव शोक में बदल चुका था। 🚩🕉️जहाँ मंगलगीत गूँजने चाहिए थे, वहाँ विलाप सुनाई दे रहा था। जहाँ राजमार्गों पर उत्सव की सजावट होनी थी, वहाँ लोगों की आँखों में आँसू थे। 🚩🕉️श्रीराम ने राजसी वस्त्रों और आभूषणों का त्याग किया। सीता और लक्ष्मण भी वनगमन के लिए तैयार हुए। यह दृश्य देखकर राजमहल के सेवक, मंत्री और परिवारजन दुःखी हो उठे। 🚩🕉️महाराज दशरथ अपने पुत्र को रोकना चाहते थे, लेकिन वे कैकेयी को दिए गए वरदानों और अपने वचन की मर्यादा के कारण असहाय अनुभव कर रहे थे। उनके लिए यह पीड़ा केवल राजकुमार को वन भेजने की नहीं थी; उन्हें ऐसा लग रहा था मानो उनके जीवन का आधार उनसे दूर जा रहा हो। 🚩🕉️श्रीराम पिता के पास पहुँचे और उनके चरणों में प्रणाम किया। 🚩🕉️उन्होंने अपने पिता को सांत्वना दी, लेकिन स्वयं भी उनके दुःख को देखकर व्यथित थे। वे जानते थे कि उनके जाने से माता-पिता के हृदय पर गहरी चोट पहुँचेगी। फिर भी उन्होंने धर्म के मार्ग से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। 🚩🕉️सीता ने भी परिवारजनों से विदा ली। लक्ष्मण ने अपने ज्येष्ठ भ्राता की सेवा के लिए स्वयं को समर्पित किया। 🚩🕉️जब तीनों राजमहल से बाहर निकले, तो अयोध्या के नागरिक उनके पीछे चल पड़े। किसी को विश्वास नहीं हो रहा था कि उनके प्रिय राम, जिन्हें वे अपना भावी राजा मानते थे, अब वनवासी जीवन बिताने जा रहे हैं। 🚩🕉️लोग विलाप कर रहे थे। अनेक नागरिकों ने श्रीराम से लौट आने की प्रार्थना की। वे कह रहे थे कि अयोध्या का वैभव राम के बिना अर्थहीन है। 🚩🕉️लेकिन श्रीराम ने सबको समझाया कि उन्हें पिता के वचन की रक्षा करनी है। उन्होंने नागरिकों से राज्य की व्यवस्था बनाए रखने और परिवार के प्रति सम्मान बनाए रखने का आग्रह किया। 🚩🕉️राजा के पुत्र के रूप में वे अपने अधिकारों का उपयोग करके वनवास को रोक सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। 🚩🕉️यहाँ रामकथा का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पक्ष सामने आता है। श्रीराम ने अपने दुःख को दूसरों पर नहीं थोपा। उन्होंने न पिता को दोष दिया, न कैकेयी के प्रति कटुता प्रकट की और न ही भरत को अपने वनवास के लिए उत्तरदायी ठहराया। 🚩🕉️उनका आचरण बताता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी मनुष्य अपनी भाषा, व्यवहार और विचारों की मर्यादा बनाए रख सकता है। 🚩🕉️तीनों अयोध्या से आगे बढ़े और अंततः तमसा नदी के समीप पहुँचे। वहाँ उन्होंने रात्रि विश्राम किया। रामायण की कथा में आगे सुमंत्र के साथ यात्रा, गंगा तट पर निषादराज गुह से मिलन और फिर भरद्वाज मुनि के आश्रम होते हुए चित्रकूट पहुँचने के प्रसंग आते हैं। 🚩🕉️निषादराज गुह का श्रीराम के प्रति प्रेम इस बात का उदाहरण है कि सच्ची भक्ति और आत्मीयता सामाजिक पद या राजसी वैभव पर निर्भर नहीं होती। उन्होंने श्रीराम को मित्र और प्रभु दोनों भावों से सम्मान दिया। 🚩🕉️गंगा पार करने के लिए केवट का प्रसंग भी भक्तिपरंपरा में विशेष श्रद्धा से सुनाया जाता है। केवट की सरल भक्ति और प्रभु के प्रति उसका प्रेम रामकथा को एक आत्मीय मानवीय स्पर्श देता है। 🚩🕉️राजमहल से निकलकर वन की ओर बढ़ते हुए श्रीराम, सीता और लक्ष्मण का जीवन बदल रहा था। अब उनके सामने प्रकृति की कठिनाइयाँ थीं, लेकिन उनके भीतर धैर्य, विश्वास और कर्तव्य का प्रकाश था। 🚩🕉️अयोध्या में पीछे छूट गया राजसिंहासन; आगे था वन का अनिश्चित मार्ग। 🚩🕉️परंतु श्रीराम के लिए धर्म का मार्ग ही जीवन का वास्तविक पथ था। 🚩🕉️आध्यात्मिक संदेश: परिस्थितियाँ हमारे जीवन का बाहरी स्वरूप बदल सकती हैं, लेकिन हमारे भीतर के मूल्यों को नहीं बदलना चाहिए। श्रीराम का वनगमन सिखाता है कि दुःख में भी मर्यादा, त्याग में भी धैर्य और कठिनाइयों में भी कर्तव्य का पालन संभव है। 🚩🕉️श्रंखला जारी है ----- 🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️