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मैनपुरी- बारात में गए सभी लोग बने पत्थर की मूरत #story # ऊपरी शक्ति

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मैनपुरी- बारात में गए सभी लोग बने पत्थर की मूरत #story # ऊपरी शक्ति

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एकर- हरगांव और कस्बे का एक इतिहास रहता है जिसमें छिपी रहती है उनकी बनने, बसने की कहानी ऐसी ही कुछ कहानी है उत्तर प्रदेश के जिला मैनपुरी की, जो जुड़ी है एक शादी में गये बाराती की शादी में गए सभी बाराती बन गए थे पत्थर की मूरत मैनपुरी की हर गली मोहल्ले के लोगों की जुबान पर यह किस्सा आपको सुनने को मिल जाएगा.... तो देर किए बिना आइए आपको बताते हैं इस कहानी के बारे में.... मैनपुरी शहर की नगरिया मोहल्ले में माया नाम के एक व्यक्ति रहते थे उन्हें मयन ऋषि भी कहा जाता है उनके नाम पर ही मैनपुरी का नाम पड़ा उनके बारे में कहा जाता है कि उनके पिता का बचपन मैं ही स्वर्गवास हो गया था... माता ने ही पाल पोस कर उन्हें बड़ा किया... मयन जब जवान हुए तब उनकी शादी बगल के गांव में तय की गई शादी की तैयारियां शुरू हो गई और मयन बारात लेकर धारउ गांव के लिए रवाना हो गए... इसी बीच रास्ते में मयन को याद आया कि उनका पटका तो घर में ही रह गया..... इसी बीच बारात को धारउ के लिए भेज कर वो अपना पटका लेने वापस अपने गांव पहुंच गए.... जब की बारात धारउ में पहुंच गई वहां बारात का खूब स्वागत सत्कार हुआ हालांकि हर किसी की निगाहें दूल्हे पर थी जो कहीं नजर नहीं आ रहा था दूसरी ओर मयन जब पटका लेने घर पहुंचे तो देखा कि उनकी माता नांद में जल्दी-जल्दी खाना खा रही थी उन्होंने पूरा खाना जूठा कर दिया था.... mainpuri ki history mainpuri ke bare me mainpuri ke name ke bare me history of mainpuri rishi mayan anokhi kahaniya anokhi kahani rahasymai kahani adbhut kahani gaw ki kahaniya prem ki kahaniya love story shadi ki kahaniya husband wife ki kahaniya mainpuri ki kahani mainpuri name q pada यह देख मयन ने मां से कहा कि आपने यह क्या कर दिया सभी बारातियों का खाना जूठा कर दिया वहां से आकर बाराती क्या खाएंगे इतनी जल्दी-जल्दी नांद में खाना क्यों खा रही हो? तो माता ने जवाब दिया कि बेटा आज मैं पेट भर के खाना खा लू वरना कल को बहू आएगी तो शायद भरपेट खाना नहीं मिलेगा....माँ की यह बात मयन के दिमाग में घर कर गई कहते हैं उसी पल उन्होंने प्रण किया कि वह शादी ही नहीं करेंगे और हमेशा अपनी मां की सेवा करेंगे माता बार-बार समझाती रही मगर मयन टस से मस नहीं हुए दूसरी ओर धारऊ गांव में बाराती उनका इंतजार करते रहे सुबह से शाम हुई और फिर दिन महीने बदले लेकिन मयन नहीं आए.... कहा जाता है कि समय का चक्र ऐसा था की बाराती इंतजार करते रहे वही पत्थर के हो गए लेकिन मयन नहीं पहुंचे वहीं माँ के लिए आजीवन शादी न करने का प्रण करने के बाद मयन ऋषि कहलाए इन्हीं के नाम पर बाद में मैनपुरी का नाम पड़ा मैनपुरी। मैनपुरी में पत्थर हुई बारातियों की प्रतिमाएं आज भी हैं जिनकी पूजा की जाती है मैनपुरी में मान्यता है कि जो जोड़ा पहली बार घर वापस आता है वह पहले दिन वहां जा कर पूजा करता है उसके बाद ही बहू घर आती है #story #historical #mandir #mainpuri