जीवित्पुत्रिका व्रत कथा | जीमूतवाहन की कथा | चील सियारिन कथा Jitiya Vrat Katha 2026
Hindu religion stories and mantra
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जीवित्पुत्रिका व्रत कथा | जीमूतवाहन की कथा | चील सियारिन कथा Jitiya Vrat Katha 2026
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जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जितिया या जिउतिया व्रत भी कहा जाता है, संतान की दीर्घायु, आरोग्य और मंगल की कामना से किया जाने वाला प्रसिद्ध व्रत है।
इस वीडियो में सुनिए जीवित्पुत्रिका व्रत की प्रचलित चील और सियारिन की कथा।
एक जंगल में चील और सियारिन दो सहेलियाँ रहती थीं। दोनों ने महिलाओं को जितिया व्रत करते देखकर स्वयं भी व्रत रखने का संकल्प लिया। चील ने पूरे संयम के साथ व्रत रखा, जबकि सियारिन भूख सहन न कर सकी और रात्रि में भोजन कर बैठी। लोक-परंपरा में इस कथा के माध्यम से व्रत में श्रद्धा, संयम और संकल्प की महत्ता बताई जाती है।
अगले जन्म में दोनों बहनों के रूप में जन्म लेती हैं। बड़ी बहन शीलवती के सातों पुत्र दीर्घायु होते हैं, जबकि छोटी बहन कपुरावती की संतानें बार-बार मृत्यु को प्राप्त होती हैं। बाद में पूर्वजन्म का रहस्य सामने आता है और कपुरावती को अपने पिछले जन्म में व्रत भंग करने की बात ज्ञात होती है।
इस कथा के साथ जीमूतवाहन का स्मरण भी जीवित्पुत्रिका व्रत की परंपरा में किया जाता है। जीमूतवाहन को कथा-परंपरा में एक महान त्यागी और धर्मात्मा राजा/विद्याधर पुरुष के रूप में वर्णित किया जाता है, जिन्होंने नागपुत्र की रक्षा के लिए अपना जीवन तक अर्पित करने का संकल्प लिया था।
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