Class 10 Hindi B | Manushyata Part - 1 | By Monika ma'am
Kaksha- The class📚📖
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Class 10 Hindi B | Manushyata Part - 1 | By Monika ma'am
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Manushyata Part - 1
Chapter 4 of स्पर्श 2
Detailed explanation
All hard words with meanings
Samas
"रंतिदेव" चंद्र वंश के एक राजा थे । दयालु स्वभाव के रूप में वर्णित, उन्होंने त्रिमूर्ति द्वारा उनकी आस्था की परीक्षा लेने पर विष्णु भगवा से मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त किया। भरत के वंशज थे, उन्हें हिंदू साहित्य में एक उदार राजा के रूप में वर्णित किया गया है ।
"उशीनर क्षितीश" का अर्थ "उशीनर देश का राजा" होता है, जो पौराणिक कथाओं के प्रसिद्ध राजा शिवि के लिए प्रयुक्त हुआ है।पौराणिक कथा: एक बार देवताओं के राजा इंद्र ने 'बाज' और अग्निदेव ने 'कबूतर' का रूप धारण कर राजा शिवि के शरणागतवत्सल धर्म की परीक्षा ली। बाज से डरकर कबूतर राजा की गोद में आकर छिप गया। जब बाज ने अपना भोजन (कबूतर) वापस मांगा, तो राजा ने शरणागत की रक्षा करने के लिए कबूतर के वजन के बराबर अपने शरीर का मांस काटकर बाज के तराजू में रख दिया था।
"दधीचि" (जिन्हें दधिचि या महर्षि दधीचि भी कहा जाता है) हिंदू पौराणिक कथाओं के एक महान और परम त्यागी ऋषि हैं। उन्होंने लोक कल्याण और अधर्म के नाश के लिए अपनी अस्थियों (हड्डियों) का दान कर दिया था। असुर वृत्रासुर का अत्याचार बहुत बढ़ गया था, जिसे किसी साधारण अस्त्र से नहीं मारा जा सकता था। ब्रह्मा जी ने देवताओं को बताया कि केवल महर्षि दधीचि की पवित्र हड्डियों से बने अस्त्र से ही उस असुर का वध संभव है। जब देवराज इंद्र ने दधीचि से उनकी अस्थियां मांगी, तो उन्होंने बिना किसी संकोच के लोक कल्याण के लिए अपने प्राण त्याग दिए। उनकी रीढ़ की हड्डी (Spine) से देवराज इंद्र के मुख्य अस्त्र 'वज्र' का निर्माण हुआ।
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