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“दैनिक गीता सार | अध्याय 2 – सांख्य योग | श्रीकृष्ण का प्रथम उपदेश | आत्मज्ञान का आरंभ”

Jivan Geeta и Daivik Kahaniyaan

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“दैनिक गीता सार | अध्याय 2 – सांख्य योग | श्रीकृष्ण का प्रथम उपदेश | आत्मज्ञान का आरंभ”

38 просмотров · 9 месяцев назад
Jivan Geeta и Daivik Kahaniyaan
38 просмотров · 9 месяцев назад
🙏 दैनिक गीता सार – दिवस 2 अध्याय 2 : सांख्य योग – श्रीकृष्ण का प्रथम उपदेश 🙏 आज हम गीता के दूसरे अध्याय “सांख्य योग” में प्रवेश कर रहे हैं— वह अध्याय जहाँ पहली बार श्रीकृष्ण अर्जुन को दिव्य उपदेश देते हैं। यह अध्याय गीता का हृदय है। यही से शुरू होता है— आत्मज्ञान, विवेक, स्थिर बुद्धि और कर्मयोग का मार्ग। इस वीडियो में आप सुनेंगे— ✔️ क्यों अर्जुन के विषाद के बाद कृष्ण बोलना प्रारंभ करते हैं ✔️ आत्मा की नित्य, अविनाशी प्रकृति ✔️ जन्म और मृत्यु का शाश्वत रहस्य ✔️ “स्थिर बुद्धि” (Stithaprajna) का दिव्य स्वरूप ✔️ कर्तव्य का सच्चा अर्थ ✔️ कर्मयोग की नींव – कर्म करते हुए भी अनासक्त रहना ✔️ दुःख, भय और मोह को जीतने का मार्ग ✔️ मंत्रमय शांति और ध्यान का समापन यह व्याख्या आपके प्रातःकाल को आध्यात्मिक गहराई, शांति और आत्मिक जागृति से भर देगी। हर सुबह 6 बजे – ‘दैनिक गीता सार’ का नया भाग। जय श्रीकृष्ण। 🙏