बँटवारे में बेटों ने माँ को आँगन का एक कोना दिया… पर तुलसी के गमले के नीचे पिता की पोटली थी
जो मैंने कभी नहीं कहा
0:00 / 0:00
बँटवारे में बेटों ने माँ को आँगन का एक कोना दिया… पर तुलसी के गमले के नीचे पिता की पोटली थी
137 просмотров · 5 дн. назад
जो मैंने कभी नहीं कहा
13 подписчиков
137 просмотров · 5 дн. назад
"माँ, आपके लिए आँगन का ये कोना है। तुलसी के पास।" ये बात मेरे बड़े बेटे ने अपने पिता की तेरहवीं के अगले ही दिन, सुबह की चाय पर कही।
मेरा नाम कमला है। लखनऊ के पुराने शहर में रहती हूँ। ये कहानी है एक सफ़ेद धागे की, लालटेन की रोशनी में काढ़े गए रूमाल की, रेलवे के एक बाबू की पुरानी कॉपी की… और उस सुबह की, जब तुलसी के गमले के नीचे से एक लाल पोटली निकली।
आप मेरी जगह होते तो क्या करते? कमेंट में ज़रूर लिखिए और बताइए कि आप किस शहर से सुन रहे हैं। कहानी अच्छी लगी हो तो चैनल को सब्सक्राइब कीजिए।
अध्याय
00:00 “माँ, आपके लिए आँगन का ये कोना है”
01:53 चौक की छोटी गली
03:52 लालटेन के नीचे पहला रूमाल
05:58 आँगन में दो छोटे बेटे
08:06 चश्मे के पीछे सुई
10:11 आलोक की कॉलेज की फीस
12:27 तुलसी के पास खुली कॉपी
14:40 रसोई वाली माँ
16:32 तुलसी को पानी देना
18:31 नक्शे में माँ का गोला
20:31 गमले के नीचे की मिट्टी
22:32 कमला का पुराना हिसाब
24:40 कॉपी का आख़िरी पन्ना
26:40 बेटों के हाथ जुड़े
28:46 आँगन में कढ़ाई की कक्षा
30:40 बल्ब के नीचे की बात
यह एक काल्पनिक कहानी है, जो मनोरंजन और सीख के लिए बनाई गई है। नाम, जगहें और घटनाएँ काल्पनिक हैं; किसी असली व्यक्ति से समानता संयोग मात्र है।
This is a fictional story inspired by everyday family situations, made to entertain and to share a social message. Names and events are fictional.
#hindikahani #maakikahani #saasbahu #emotionalstory #hindistory #kahani