तीर्थ से भी श्रेष्ठ क्यों हैं संतों के दर्शन? | श्रीमद्भागवत
Katha Se Shiksha
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तीर्थ से भी श्रेष्ठ क्यों हैं संतों के दर्शन? | श्रीमद्भागवत
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Katha Se Shiksha
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श्रीमद्भागवत की इस कथा में भगवान श्रीकृष्ण संत-महात्माओं के दर्शन और सेवा का अद्भुत महत्त्व बताते हैं। कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण के अवसर पर अनेक ऋषि-मुनि आए, जिनका श्रीकृष्ण, बलराम और सभी राजाओं ने सम्मानपूर्वक स्वागत किया। भगवान ने कहा कि तीर्थ और देवताओं की उपासना से भी जो शुद्धि लंबे समय में होती है, वह महापुरुषों के दर्शन और सेवा से शीघ्र प्राप्त हो सकती है। इसलिए संतों का संग, दर्शन और सेवा जीवन को कृतार्थ करने वाला है। #श्रीमद्भागवत #सनातनधर्म