बहादुर शाह ज़फ़र की ग़ज़ल और बच्चन जी की कविता 📜 | लाइव काव्य महफ़िल | रोज़ी की आवाज़ में
dairy k panno se,
0:00 / 0:00
बहादुर शाह ज़फ़र की ग़ज़ल और बच्चन जी की कविता 📜 | लाइव काव्य महफ़िल | रोज़ी की आवाज़ में
1 091 просмотр · Трансляция закончилась 7 дн. назад
dairy k panno se,
71 подписчик
1 091 просмотр · Трансляция закончилась 7 дн. назад
स्वागत है आप सभी का मेरे चैनल '@thediaryandsoul' पर! 🌸
आज के इस विशेष लाइव सेशन में मैंने आपके साथ साझा की हैं दो ऐसी रचनाएँ जो जीवन की गहरी सच्चाइयों और हौसलों को बयाँ करती हैं:
🎙️ आज की प्रस्तुति:
बहादुर शाह ज़फ़र - 'लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में' (दर्द और तन्हाई का अहसास)
डॉ. हरिवंश राय बच्चन - 'लहरी से डरकर नौका पार नहीं होती' (असफलता से न हारने का संदेश)
अपनी भावनाएँ और विचार कमेंट सेक्शन में ज़रूर साझा करें। अगर यह महफ़िल आपको पसंद आई हो, तो वीडियो को लाइक करें और चैनल को सब्सक्राइब ज़रूर करें।
✨ हमारे साथ जुड़े रहें:
#LivePoetry #RoziKiAwaz #HarivanshRaiBachchan #BahadurShahZafar #HindiKavita #UrduShayari #TheDiaryAndSoul #GhazalLovers