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आएँ, संस्कृत सीखें -- भाग-3 ; व्यञ्जन-वर्ण ( हल् ) एवम् अयोगवाह-वर्ण

SANSKRIT GYANWAARIDHI / संस्कृत ज्ञानवारिधि

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आएँ, संस्कृत सीखें -- भाग-3 ; व्यञ्जन-वर्ण ( हल् ) एवम् अयोगवाह-वर्ण

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SANSKRIT GYANWAARIDHI / संस्कृत ज्ञानवारिधि
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"संस्कृत-व्याकरण-शिक्षण की सरलतम पद्धति -- आएँ, संस्कृत सीखें" -- "अक्षर-ज्ञान से दीर्घ-वाक्य-ज्ञान तक" / डॉ.ललित कुमार मण्डल, सीनियर असिस्टेण्ट प्रोफ़ेसर Learn Sanskrit: संस्कृत-वर्णमाला Alphabets संस्कृत कोई बहुत कठिन भाषा नहीं है, बस आवश्यकता है, सही ढंग से, प्राकृतिक ढंग से इसे पढ़ने की। हम संस्कृत-व्याकरण को सरलतम ढंग से पढ़ाएँगे। बस आपसे अपेक्षा रहेगी कि संस्कृत को थोड़ा प्रेम दें और निश्चिन्त रहें कि संस्कृत आपको असीम आनन्द देगी। यह पाठ संस्कृत वर्णमाला -- स्वर, व्यञ्जन तथा अयोगवाह वर्णों (अक्षरों ) को सरल ढंग से सिखाता है। शुद्ध संस्कृत उच्चारण के लिए यह जरूरी है। यह प्रयत्न जिस सरलतम ढंग से संस्कृत व्याकरण को प्रस्तुत करता है, वह पाठकों को बलात् आकर्षित कर लेता है। उसमें आत्मविश्वास उत्पन्न करता है और सीखने के प्रति रुचि पैदा करता है। यह प्रयत्न महर्षि पाणिनि की अष्टाध्यायी पर आधारित है, किन्तु व्याकरण जैसे गम्भीर विषय को जितना सम्भव हो सके, सरल ढंग से प्रस्तुत करता है। हमारा पहला प्रयास ही यह है कि पाठक का यह भय निकाला जा सके कि संस्कृत एक कठिन भाषा है। एक बार जैसे ही आप संस्कृत व्याकरण के मूल नियमों से परिचित हो जाते हैं, तो आप संस्कृत के सरल गद्य, पद्य (श्लोक), कथा-कहानियाँ पढ़ने के लिए तैयार हो जाते हैं। यह प्रयत्न संस्कृत-भाषाप्रेमियों के लिए वरदान है, यह उनको संस्कृत- व्याकरण सीखकर संस्कृत-भाषा को शुद्ध-शुद्ध रूप से लिखने, पढ़ने और बोलने में शीघ्र ही समर्थ बना देगा।