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नन्ददुलारे, राधा जू के प्यारे, प्राण हमारे | प्रकीर्ण - माधुरी | Ft.Akhileshwari Didi

Sankirtan Akhileshwari Didi

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नन्ददुलारे, राधा जू के प्यारे, प्राण हमारे | प्रकीर्ण - माधुरी | Ft.Akhileshwari Didi

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Sankirtan Akhileshwari Didi
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नन्ददुलारे, राधा जू के प्यारे, प्राण हमारे, जाऊँ तिहारी बलिहार। सुन्दरताहूँ जासु लजाई, ललित त्रिभंगी छवि मो मन भाई। नैन रतनारे,मैन मदमारे, सैन मनहारे, छविनिधि नन्दकुमार। तरु-तमाल श्यामल-तनु धारी, राधा-मानस-हंस-मुरारी। कारे कारे, अति अनियारे, कच घुँघरारे, जनु अलि-पंक्ति अपार। मोर मुकुट सिर पेच विराजै, मृगमद-तिलक भाल छवि छाजै। गुंजमाल धारे, पीतपट वारे, पग अरुणारे, मृदु नूपुर झनकार। बेसर सुघर नासिका सोहै, लाल अधर लाली मन मोहै। ओ वंशीवारे, जन रखवारे, काहे बिसारे, ओर 'कृपालु' निहार ।। हे नन्दकुमार! हे राधारमण! हे प्राणेश्वर! मैं तुम्हारी बार-बार बलैया लेता हूँ। जिनके सौन्दर्य को देखकर सौन्दर्य भी लज्जित होता है, वह ग्रीवा-कटि-पद-भंगी वाली मनोहर मूर्ति मेरे मन में बस गयी है। जिनकी आँखें अत्यन्त मतवाली, कामदेव के अभिमान को भी नष्ट करने वाली हैं एवं जिनकी आँखों की सैन मन को मोहित करने वाली है वे श्यामसुन्दर रूप की निधि है। जिनका शरीर तमाल-वृक्ष की तरह श्याम रंग का है, जो राधिका जी के मन रूपी सरोवर में हंस के समान निवास करते हैं जिनके बाल अत्यन्त ही घने, काले एवं घुँघराले हैं, मानो भौरों की पंक्ति मुख की ओर जा रही हो जिनके सिर पर मोर पंख का मुकुट शोभित हो रहा है, जिनके ललाट पर कस्तूरी का तिलक चमक रहा है जो गुंजमाला धारण किये हुए हैं, जो पीताम्बर पहने हुए हैं। जिनके चरणों के तलुवे लाल-लाल हैं, जिनके चरणों में नूपुर की मधुर ध्वनि हो रही है जिनकी नाक में सुन्दर बेसर सुशोभित है, जिनके अधरों की लालिमा किशोरी जी के मन को भी मोहित करने वाली है। हाथ में मुरली लिए हुए, हे भक्तों की रक्षा करने वाले! तुमने मुझे क्यों भुला दिया?'श्री कृपालु जी' कहते हैं कि मेरी ओर भी कृपा दृष्टि करो।