मरने से पहले असुर ने गाई भगवान की अमर स्तुति! इंद्र-वृत्रासुर संवाद और महामोक्ष Bhagwat Katha Story
Bhagwat Katha Story
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राधे-राधे भक्तों!
श्रीमद्भागवत के षष्ठ स्कंध में वर्णित, राजा चित्रकेतु की कथा के दूसरे भाग (Part 2) में श्रवण कीजिए महाबली वृत्रासुर का प्राकट्य, रणभूमि में देवराज इंद्र से रोमांचक संवाद, अमर चतुःश्लोकी स्तुति और दिव्य मोक्ष की पावन कथा।
जानिए कैसे महर्षि दधीचि की अस्थियों से बने वज्र के सामने भी वृत्रासुर निर्भय खड़े रहे। जब इंद्र का वज्र हाथ से छूट गया, तो वृत्रासुर ने निहत्थे शत्रु पर वार न करके उन्हें धर्म और काल की कठपुतली का परम ज्ञान दिया। रणभूमि में साक्षात मृत्यु को सम्मुख पाकर एक असुर के नेत्रों से प्रभु के विरह के आँसू क्यों बहने लगे? और अंत में कैसे एक दैत्य का शीश कटने पर उसके शरीर से निकली ज्योति सीधे भगवान के श्रीचरणों में सदा के लिए लीन हो गई!
✨ कमेंट में हाजिरी लगाएं:
यदि वृत्रासुर की इस अगाध भक्ति और निष्काम प्रेम ने आपके मन को छुआ हो, तो कमेंट बॉक्स में पूरे भाव से 'राधे-राधे', 'हरि शरणम्' या 'जय श्री कृष्ण' लिखकर अपनी हाजिरी अवश्य लगाएं।
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