राधा रानी जन्मोत्सव भजन | धनी धनी भादो सुघर महीना | राधाष्टमी स्पेशल 2026 | Radha Rani Bhajan 2026
Divya Ras
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राधा रानी जन्मोत्सव भजन | धनी धनी भादो सुघर महीना | राधाष्टमी स्पेशल 2026 | Radha Rani Bhajan 2026
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राधा रानी के पावन जन्मोत्सव पर समर्पित यह सुंदर भजन प्रेम और भक्ति से भरपूर है।
बरसाने की गलियों में आज बधाई गूंज रही है, सखियां मंगल गीत गा रही हैं और हर ओर राधे-राधे की धुन सुनाई दे रही है। 🌺🙏
॥ राधा रानी जन्मोत्सव भजन ॥
मुखड़ा
धनी धनी भादो सुघर महीना, अष्टमी तिथि पावन होय,
रामा बरसानें भई प्रकट दुलारी, झूम उठी ब्रज नगरी होय।
धनी धनी भादो सुघर महीना, अष्टमी तिथि पावन होय,
रामा बरसानें भई प्रकट दुलारी, झूम उठी ब्रज नगरी होय।
अंतरा 1
वृषभान के द्वारे बाजे बधैया, महल विच सोहर होय,
कीरति मैया की गोद दुलारी, रूप मनोहर होय।
रामा सोहेला मंगल गावैं, सखियों का हु हुलास होय,
ललिता विषाखा फूल बरसावैं, मन में प्रेम प्रकाश होय।
धनी धनी भादो सुघर महीना, अष्टमी तिथि पावन होय,
रामा बरसानें भई प्रकट दुलारी, झूम उठी ब्रज नगरी होय।
अंतरा 2
आरती उतारे गोपी ग्वाल, डफ और झांझ बजावैं होय,
मंगल कलश सजा के आंगन, दीपक ज्योत जलावैं होय।
रामा धनी धनी वृषभान के भाग, दरस सब पावैं होय,
राधा नाम की मधुरी धुन पर, मनवा झूमत जावैं होय।
धनी धनी भादो सुघर महीना, अष्टमी तिथि पावन होय,
रामा बरसानें भई प्रकट दुलारी, झूम उठी ब्रज नगरी होय।
अंतरा 3
बरसाने की गलियन सजी हैं, रंग-बिरंगी छटा होय,
फूलन की बरखा होती जाए, चारों ओर सुगंध होय।
रामा नंद के नंदन सुनि के, मन में हरष अपार होय,
राधा नाम सुनते ही कान्हा, भूलैं अपना संसार होय।
धनी धनी भादो सुघर महीना, अष्टमी तिथि पावन होय,
रामा बरसानें भई प्रकट दुलारी, झूम उठी ब्रज नगरी होय।
अंतरा 4
मैया कीरति लाल चुनरिया, राधा को पहनावैं होय,
माथे बिंदिया, कानन कुंडल, फूलन हार सजावैं होय।
रामा नन्ही सी राधा रानी, चितवन मन हर लेय,
जिनके दर्शन पाकर प्राणी, जन्म-जन्म का सुख लेय।
राधा रानी के चरणन में, प्रेम से शीश नवायें होय,
जिसके मन में राधा बसतीं, उसके भाग जगायें होय।
अंतरा 5
जो सुख दुर्लभ ब्रह्मादिक को, सनकादिक मुनि ध्यावैं होय,
रामा सोई राधा रानी बरसाने, आज घर-घर मंगल गावैं होय।
देव मुनि सब फूल बरसावैं, जय जयकार सुनायें होय,
राधा नाम की पावन महिमा, वेद पुराण बतायें होय।
धनी धनी भादो सुघर महीना, अष्टमी तिथि पावन होय,
रामा बरसानें भई प्रकट दुलारी, झूम उठी ब्रज नगरी होय।
अंतरा 6
सखियां मिलकर गीत सुनावैं, मंजीरा छनकावैं होय,
कोई ढोलक कोई मृदंग बजावै, कोई ताली बजावैं होय।
रामा राधे राधे बोलत, गूंजे सारा धाम होय,
जिसके मुख पर राधा नाम हो, सफल उसी का काम होय।
बरसाने की पावन धरती, धन्य धन्य कहलाय होय,
राधा रानी जन्मी जहां पर, तीनों लोक मुस्काय होय।
अंतरा 7
यमुना तट पर लहरें उठतीं, मंद पवन सुखदाय होय,
वृंदावन की कुंज गलिन में, राधा नाम सुनाय होय।
मोर पपीहा कोयल बोले, मधुर मधुर स्वर होय,
राधा रानी के जन्म दिवस पर, मंगल ही मंगल होय।
धनी धनी भादो सुघर महीना, अष्टमी तिथि पावन होय,
रामा बरसानें भई प्रकट दुलारी, झूम उठी ब्रज नगरी होय।
अंतरा 8
ललिता सखी ने थाल सजाया, विषाखा दीप जलाय होय,
चंपा चमेली बेला मोगरा, फूलन से महकाय होय।
सखियां राधा नाम पुकारें, नाचे मन मतवाला होय,
रामा आज बरसाने धाम में, प्रेम का रंग निराला होय।
राधे राधे नाम की धुनिया, हर दिशा में छाय होय,
जिसने राधा नाम पुकारा, भवसागर तर जाय होय।
अंतरा 9
वृषभान जी धन्य हुए हैं, धन्य हुई कीरति माय होय,
जिनके आंगन राधा आईं, उनकी जय जयकार होय।
रामा भाग बड़े बरसाने के, जहां राधा अवतार होय,
तीर्थ सभी फीके लगते हैं, जहां राधा दरबार होय।
धनी धनी भादो सुघर महीना, अष्टमी तिथि पावन होय,
रामा बरसानें भई प्रकट दुलारी, झूम उठी ब्रज नगरी होय।
अंतरा 10
कान्हा मन ही मन मुस्कावैं, राधा रूप निहारैं होय,
राधा बिना अधूरा श्याम है, श्याम बिना राधा प्यारी होय।
दोऊ नाम की जोड़ी प्यारी, जग में सबसे न्यारी होय,
राधा नाम के साथ जो बोले, उसकी दुनिया प्यारी होय।
रामा राधे राधे जप ले मनवा, यही अमोलक धन होय,
राधा नाम की छांव में बैठो, दूर सभी संकट होय।
अंतरा 11
घर-घर आज बधाई गूंजे, मंगल गीत सुनावैं होय,
नन्ही राधा के जन्म दिवस पर, पकवान सभी बनावैं होय।
दूध दही माखन मिश्री लेकर, थाल सजाकर लावैं होय,
राधा रानी के चरणन में सब, प्रेम से भोग लगावैं होय।
धनी धनी भादो सुघर महीना, अष्टमी तिथि पावन होय,
रामा बरसानें भई प्रकट दुलारी, झूम उठी ब्रज नगरी होय।
अंतरा 12
जिसने राधा नाम लिया है, उसका जीवन धन्य होय,
सूने मन में प्रेम खिलेगा, मिटे हृदय का शोक होय।
राधा रानी दया की सागर, सब पर कृपा बरसावैं होय,
दीन दुखी जो द्वार पे आए, खाली कभी न जावैं होय।
रामा राधा रानी की महिमा, जग में अपरंपार होय,
जिसके सिर पर हाथ रख दें वो, भव से बेड़ा पार होय।
अंतरा 13
बरसाने की रज को माथे, प्रेम से आज लगावैं होय,
राधा रानी के चरणन की धूलि, जीवन सफल बनावैं होय।
मन मंदिर में दीप जलाकर, राधा नाम सुनावैं होय,
अंतर के सब द्वार खोलकर, प्रेम सुधा बरसावैं होय।
धनी धनी भादो सुघर महीना, अष्टमी तिथि पावन होय,
रामा बरसानें भई प्रकट दुलारी, झूम उठी ब्रज नगरी होय।
अंतरा 14
राधा नाम बड़ा सुखदायी, राधा नाम सहारा होय,
डूबत नैया पार लगावे, राधा नाम किनारा होय।
दुनिया के सब रिश्ते छूटें, राधा नाम न छूटे होय,
जिसके मन में राधा बसतीं, भाग्य उसी का फूटे? — नहीं, फूले होय।
रामा प्रेम की ऐसी गंगा, मन का मैल बहाय होय,
राधा रानी की कृपा पड़ी तो, जीवन सफल बनाय होय।
आज बरसाने मंगल छाया, गूंजे जय जयकार होय,
राधा रानी प्रकट भई हैं, धन्य हुआ संसार होय।
फूल बरसैं, दीप जलैं और, हर मुख राधा नाम होय,
राधे राधे बोलत-बोलत, पूर्ण होय हर काम होय।
धनी धनी भादो सुघर महीना, अष्टमी तिथि पावन होय,
रामा बरसानें भई प्रकट दुलारी, झूम उठी ब्रज नगरी होय।
रामा बरसानें भई प्रकट दुलारी, झूम उठी ब्रज नगरी होय,
रामा बरसानें भई प्रकट दुलारी, झूम उठी ब्रज नगरी होय।
राधे राधे बोलो, राधे राधे बोलो,
बरसाने वाली राधे राधे बोलो।