SHRUTI GUPTA SINGING RAGA MIYA MALHAR, GAUD MALHAR AND A KAJRI CURATED BY MIHIR THAKORE
MIHIR THAKORE-HINDUSTANI CLASSICAL MUSIC
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SHRUTI GUPTA SINGING RAGA MIYA MALHAR, GAUD MALHAR AND A KAJRI CURATED BY MIHIR THAKORE
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MIHIR THAKORE-HINDUSTANI CLASSICAL MUSIC
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ACCOMPANISTS : TABLA-SHRI SUBRATA GUPTA
HARMONIUM- SHRI KAMALAKSHA MUKHERJEE
Bandishes:
मियां की मल्हार:
१/ विलंबित एकताल
करीम नाम तेरो
तू साहेब सत्तार।।
दुख दरिद्र सब दूर कीजे
सुख देहो सबन को
अदारंग बिनती करत
सुन लेहो करतार।।
२/ द्रुत तिनताल
गरजे गरजे घन बरसे बदरा
कारे कारे अत ही डरावे
निस अंधियारी कारी कारी मा रुमझुम।।
चमक चमक बिजुरिया चमके
गरज गरज बादरवा गरजे
चलत पवन पुरवैयां सनन।।
३/ द्रुत एकताल
मोहम्मद शाह रंगीले रे बलमा
तुम बिन मै का कारी बदरिया नेक ना सुहावे।।
उमड घुमड घन आवे
नैनन सों झर लगावे
तरसावे सदारंगीले को
सुखदायी चमक बीच डरावे।।
गौड़ मल्हार
१/ विलंबित तिनताल
मान ना कर री गोरी
तेरे कारण आयो मेहा।।
हरी हरी भुम पर बरसों ही आवे
नई नार, नयो नेहा।।
२/ अद्धा / तिनताल
दादुरवा बुलायी बादरिया
घर जाई मा,
पिया बिन मोरा जिया लरजायी माँ।।
सुखरंग से कोउं जाए संदेश
पिया बिन ये रुत नाही भावे
आज हूं ना लीन्ही मोरी खबरिया।।
३/ आड़ाचौताल
उमड घन गगन आयो री
गरजे बादल बिजुरी चमकत
बरसत अत रुमझुम रुमझुम जिया डरपावे।।
मै तो अकेली बिरहन बेकल
बिरम रहे पिया परदेस
सही ना जात अब ये बिथा
घर अंगना ना भावे।।
कजरी
निंबुआ तले डोला रख दे मुसाफ़िर
आई सावन की बहार।।
अपने महल में मै गुड़िया खेलत थी
आये सैयाँ के कहार।।