चिन्दाम या रंडवेन (दो देव) सगा के गोत्र नाम | Chindam ya Randven (do dev) saga ke gotra naam | gondi
Awachitrao Sayam Gond
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चिन्दाम या रंडवेन (दो देव) सगा के गोत्र नाम | Chindam ya Randven (do dev) saga ke gotra naam | gondi
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Awachitrao Sayam Gond
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अनुरेणुवों का चक्र
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पारी कुपार लिंगों को अपने बौद्धिक ज्ञान शक्ती से संपूर्ण विश्व का ज्ञान प्राप्त हुवा था. उसी के आधार पर उन्होंने संपूर्ण कोया वंशिय गण्ड की सगायुक्त सामुदायीक गोंदोला की व्यवस्था की है .
रेणुअनुरेणु की क्रिया - प्रक्रिया द्वारा ही उन के कर्मात्मक संस्कार याने नवप्रादुर्भावीत गुणयुक्त सूक्ष्म भाग बाहर फेके जाते है और वे अन्य तत्वों से जाकर चिपकते है या अपनी ओर खिच लेते है.
वे कर्मात्मक संस्कार मुल जीस सत्व के होते है,उन्हीं के गुण संस्कार वे नित्य दर्शाते है और परस्पर विरोधी गुणसत्वों को जाकर वे चिपकते है या स्वंय खिच लेते है.
ठिक उसी तरह गोंडी पुनेम मुठवां पोय पारी कुपार लिंगों द्वारा प्रस्थापित किये गये गोंड सगा समुदाय के सगा शाखावों मे क्रिया- प्रक्रिया होती रहती है ,उस नुसार वे अपना पारी ( वैवाहिक ) संबंध प्रस्तापित करते है .
गोंड
गोंडी संस्कृती
गोंडी धर्म
कोया पुनेम
गोंडी गाथा
गोंडी पुनेम सुगाथा
कोया पुनेम सुगाथा
गोंडी गोत्र
गोत्र प्रतिके
सगापेन सगादेव
धातु - अधातु
गोंडी धर्म ध्वज
प्रिय गोंडी सगा साथियों
सप्रेम जय सेवा
मै ,तिरु. अवचितराव सयाम ,वर्धा (महाराष्ट्र ) मो 9890441417
साथियो गोंड सगा समाज की अनेक जनजातीयां विविध नामों से भारत भर निवास करती है .उन सभी गोंड जन जाती के सगा साथियों के लिये यु ट्युब पर हमनें *अवचितवाणी नामक सिरीज गोंडी धर्म ,कोया पुनेम, गोंडी पुनेम ,गोंडी संस्कृती, गोंडी सुगाथा, कोया पुनेम सुगाथा, गोंडी गाथा के रुप मे उनके जाणकारी मे वृध्दी होणे हेतु शुरु की है .
साथियों *गोंडी धर्म या गोंडी पुनेम एंव कोया पुनेम तथा गोंडवाना के अनेक रहस्यों की जाणकारी हम गोंड लोगों के गोंडी गीतों मे नृत्य एंव संगीतों मे समीटी हुई है
उसे शब्दबध्द करवां कर अनेक महानुभावों ने उसे ग्रंथ के रुप मे सगा समाज को दिया है ,पर शैक्षणिक अभाव या उस से दुरियां होणे से और अज्ञानता की वजहसे या उन्हें किताबों से लगाव नही रहने से गोंड सगाजीवों ने किताबों को नही चुना.
वे अपने नाच गाणे एंव नृत्य गीतों के माध्यमसे ही अपनी गोंडी संस्कृती को ,कोया पुनेम को, गोंडी धर्म को, गोंडी गोत्र को,सगापेन सगावेन सगादेव , गोंडी गोत्र प्रतिकों की अनमोल जाणकारी को अपने समुह में सदियों से सुरक्षीत कर उसमें जीवन जीते गये .
यह अनमोल गोंड सगा समाज की सांस्कृतीक धरोहर हर एक सगा बुध्दीजीवी ,सुशिक्षित अभ्यासु साथियों तक आज कल डिजीटल माध्यम से पहुंचे और गोंड सगा समाज मे सांस्कृतिक,
धार्मिक ,जाणकारी का आदान प्रदान होकर गोंड विवाह सगापारी तथा गोंन्डी संस्कृती के संस्कारों की जाणकारी हो यही आशावों और अपेक्षावों के साथ हम यह अवचितवाणी के द्वारा प्रयास कर रहे है .
इस व्हिडीवों के माध्यम से आप सभी समुह के गोंड सगाजीवों के लिये गोंडी संस्कृती, गोंडी धर्म, गोंडी पुनेम ,कोया धर्म, कोया पुनेम ,गोंडी सगापेन सगादेव ,उनके गोंत्र तथा उनके प्रतिकों तथा गोंडी संस्कृती नुसार सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक ,राजकिय, धार्मिक बातें तथा गढ -किल्ले, पेनकडा, पेनठाणे, गढखुट ,यादी ,पुज्यनिय गोत्र प्रतिके तथा गोंडी धर्म ध्वज ,उनके कलर तथा हमारे शरीर काया मे गोत्र नुसार धातु -अधातु की जाणकारी ,उनके गोंडी नाम ,उनके हिंदी नाम,और अन्य सभी की विस्तृत रुप से जाणकारी उपलब्ध होंगी .
साथियों इस सुनहरी अनमोल संस्कृती की जाणकारी आप को होणे हेतु कृपया इस व्हिडीओ को लाईक करे शेअर करे कॉमेंट करें और सबक्राईब करें .
धन्यवाद
जय सेवा जय गोंडवाना
अवचितराव सयाम
वर्धा (महाराष्ट्र )
मो 9890441417