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ऐसा शमशान घाट जंहा जलता है हर रोज मुर्दा | Chamunda Devi Temple | चामुंडा नंदिकेश्वर धाम | Mandir |

Trek To Travel with Abhishek

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ऐसा शमशान घाट जंहा जलता है हर रोज मुर्दा | Chamunda Devi Temple | चामुंडा नंदिकेश्वर धाम | Mandir |

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*एशिया की सबसे अमीर पंचायत 👇    • एशिया की सबसे अमीर पंचायत | SLATE GODAAN D...   *40 सालों से पहाड़ो में घूम रहा यह शख्श 👇    • #kareri laketrek 40 सालों से पहाड़ों में अ...   *मात्र 999 में करेरी लेक ट्रेक, रहना खाना, गाइड, 👇    • Kareri Lake Trek | just only @999 with foo...   चामुंडा नंदिकेश्वर धाम जिसे चामुंडा देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, यह धार्मिक स्थान हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की धर्मशाला तहसील में पालमपुर से मात्र 19 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। यह शिव शक्ति का धार्मिक मंदिर है जिसमे नंदिकेश्वर भगवान शिव को कहा गया है और चामुंडा यह देवी दुर्गा के स्वरूप श्री चामुंडा देवी को समर्पित है। मंदिर के गर्व ग्रह में माँ चामुंडा देवी की पवित्र मूर्ति विराजमान है, जो बेहद ही ऐतिहासिक और पौराणिक है। चामुंडा की मूर्ति को कई रंगों में लपेटा जाता है, लेकिन लाल और काले रंग का विशेष रूप से उपयोग किया जाता है। चामुंडा दो शब्दों से बना है चंड और मुंड पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी काली ने प्राचीन काल में इस स्थान पर एक भयंकर युद्ध में चंड और मुंड नामक दो कुख्यात राक्षसों का वध किया था। यह चंड और मुंड बहुत ही बलशाली थे जिनको व्रम्हा भगवान् से अमरता का वरदान मिला था, की आपको कोई नहीं मार सकेगा, जिसके बाद चंड और मुंड द्वारा किये गए पाप लगातार बढ़ते गए, जिससे परेशान होकर सभी देवता ने संगोष्ठी की और सभी देवता ने अपनी अपनी शक्ति से एक पुंजय तैयार किया जिसका नाम उन्होंने अम्बिका रखा और उसे कहा की अपने चंड और मुंड का संघार करना है, जिसके बाद देवी ने चंड और मुंड का संघार किया, इसलिए, देवी को चामुंडा के नाम से जाना जाता है और उनकी पूजा की जाती है। जिसका वर्णन मार्कंडेय पुराण के अंतर्गत दुर्गासप्तशती के 7वें अध्याय के 27वें श्लोक में मिलता है। धर्मशाला में चामुंडा देवी मंदिर कोई आम मंदिर नहीं है। यह हिल स्टेशन के प्रमुख पर्यटक आकर्षणों में से एक है। इस मंदिर के साथ बहुत सारा इतिहास भी जुड़ा हुआ है। यह मंदिर प्राचीन है, जो 16वीं शताब्दी का है, और कई आध्यात्मिक किंवदंतियों से जुड़ा हुआ है।