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Devguru maharaj temple || देवगुरु महाराज दर्शन 2026 ||

Ganga Singh Raikuni Vlog

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Devguru maharaj temple || देवगुरु महाराज दर्शन 2026 ||

19 просмотров · 11 дней назад
Ganga Singh Raikuni Vlog
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#uttarakhand #devbhumi_uttarakhand #devgurubrihaspati #temple #nature #beutifull समुद्र तल से लगभग 8000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। काठगोदाम से लगभग 93 KM दूर। आसपास के गांव- कोटली, देवली, इसे विश्व का एकमात्र मंदिर माना जाता है जहा देवताओं के गुरु बृहस्पति महाराज पिंडी स्वरूप में विराजमान हैं *कैसे पहुंचे: ओखलकांडा / देवली तक गाड़ी, फिर 4-5 KM की कठिन पैदल चढ़ाई। घने चीड़, देवदार, बांज के जंगलों के बीच से रास्ता है। पौराणिक मान्यता कहा जाता है सतयुग में देवराज इंद्र ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति के लिए यहां की गुफाओं में तपस्या करने आए। उन्हें खोजते हुए देवगुरु बृहस्पति यहां आए और इस शांत स्थान को देखकर यहीं ध्यानमग्न हो*देवगुरु महाराज मंदिर* उत्तराखंड का एक बहुत ही दुर्लभ और प्रसिद्ध मंदिर है। स्थान: नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक में, समुद्र तल से लगभग 8000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। काठगोदाम से लगभग 93 KM दूर। आसपास के गांव- कोटली, , देवली इसे विश्व का एकमात्र मंदिर माना जाता है जहां देवताओं के गुरु बृहस्पति महाराज पिंडी स्वरूप में विराजमान हैं। कैसे पहुंचे: हल्द्वानी / काठगोदाम भीमताल ओखलकांडा देवली तक गाड़ी, फिर 4-5 KM की कठिन पैदल चढ़ाई। घने चीड़, देवदार, बांज के जंगलों के बीच से रास्ता है। पौराणिक मान्यता: कहा जाता है सतयुग मे देवराज इंद्र ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति के लिए यहां की गुफाओं में तपस्या करने आए। उन्हें खोजते हुए देवगुरु बृहस्पति यहां आए और इस शांत स्थान को देखकर यहीं ध्यानमग्न हो गए। तभी से यह स्थान देवगुरु धाम कहलाया। खास बातें: 1. मंदिर निर्माण नहीं होता - कई बार मंदिर बनाने की कोशिश हुई, पर पत्थर भारी हो जाना, सांपों का निकलना जैसी घटनाओं के कारण काम रुक गया। इसलिए यह आज भी खुले आकाश तले प्राकृतिक स्वरूप में है। 2. महिलाओं के प्रवेश पर मान्यता - कथा है कि पहले पुजारी एक महिला थीं, गरम खीर चढ़ाने से देवगुरु रूष्ट हो गए, तभी से महिलाओं के दर्शन पर परंपरागत रोक की बात कही जाती है। 3. मान्यता - यहां दर्शन से कुंडली का गुरु दोष खत्म होता है, ज्ञान, बुद्धि, धन और संतान सुख मिलता है। गुरुवार को यहां विशेष पूजा होती है। पीले वस्त्र, पीले फूल, चने की दाल का भोग चढ़ाया जाता है। 4. *सावन और मंगसीर के महीनों में यहां भक्तों की भीड़ ज्यादा रहती है।