Bhanwal Mata ji Mandir | Bhanwal Mata Rajasthan | भंवाल माता जी का मंदिर | भुवाल माता मंदिर
VLOG WITH JODHPURI LADKA
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भंवाल माता मंदिर प्राचीन समय में भंवालगढ़ गांव (जिला नागौर) में एक खेजड़ी के पेड़ के नीचे पृथ्वी से स्वयं प्रकट हुईं। वर्तमान में भंवाल माता मंदिर मेड़ता रोड़ नागौर राजस्थान में निर्मित है | भंवाल माता को शराब वाली देवी भी कहा जाता है | यहाँ भंवाल माता मंदिर राजस्थान का एकमात्र शराब पीने वाली देवी है | मां ने भक्तों को संकेत दिया कि वे दोनों बहनें कालका व ब्रह्माणी के रूप में आई हैं लेकिन उनका मूल स्वरूप एक ही है।
इस मंदिर के बारे में एक अन्य कथा भी प्रचलित है। जिसके अनुसार इस मंदिर का निर्माण संवत 1119 में डाकुओं ने करवाया था। ऐसी दंतकथा है कि डाकू माता की शरण में आये और माता ने उनकी रक्षा की। इसलिए डाकुओं ने इस मंदिर का निर्माण करवाया। इस कथा के अनुसार वि.सं. 1050 के आसपास डाकुओं के एक दल को राजा की फौज ने घेर लिया था। मृत्यु को निकट देख उन्होंने देवी मां को याद किया।
मां ने अपने प्रताप से डाकुओं को भेड़-बकरी के झुंड में बदल दिया। इस प्रकार डाकुओं के प्राण बच गए। बाद में डाकुओं ने विचार किया कि मां को प्रसाद चढ़ाना चाहिए लेकिन उनके पास कुछ नहीं था। तभी उनमें से किसी ने कहा कि मां तो प्रेम से भी प्रसन्न हो जाती हैं। इसलिए प्रेम सहित मां को कुछ भी चढ़ाओ, वे स्वीकार कर लेंगी। डाकुओं के पास थोड़ी-सी मदिरा थी। उन्होंने मां के होठों से वह प्याला लगा दिया और वह खाली हो गया। डाकुओं को आश्चर्य हुआ। उन्होंने दूसरा प्याला लगाया और वह भी खाली हो गया। उत्सुकतावश उन्होंने तीसरा प्याला लगाया तो वह आधा ही खाली हुआ। आधा प्याला मां ने भैरों के लिए छोड़ दिया था। इसके बाद डाकुओं ने डकैती करनी बंद कर दी।
श्री भुवाल माता का मंदिर जैतारण-मेड़ता मार्ग पर स्थित है। यात्रियों की सुविधा हेतु यहाँ बैंगाणी बंधुओं द्वारा निर्मित धर्मशाला और भोजनशाला की व्यवस्था है।
QUIRES SOLVED :
1. भवाल माता किसकी कुलदेवी है?
2. ढाई प्याला शराब कौन सी माता को चढ़ाई जाती है?
3. bhanwal mata mandir kaise jaye
4. sharab peene wali
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