“संत शरणागति से ईश्वर की प्राप्ति होती है”— ब्रह्मचारी कल्याणस्वरूप
shri dharmsangh shri ganganagr
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“संत शरणागति से ईश्वर की प्राप्ति होती है”— ब्रह्मचारी कल्याणस्वरूप
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🌺 ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग कठिन नहीं है, आवश्यकता है तो केवल सही संगति और प्रभु के प्रति सच्चे प्रेम की। भगवान श्रीराम ने भक्ति की पहली दो सीढ़ियाँ बताते हुए कहा—
“प्रथम भगति संतन्ह कर संगा, दूसरि रति मम कथा प्रसंगा।”
अर्थात् पहली भक्ति है संतों का संग और दूसरी भक्ति है प्रभु की कथा में प्रेम। संतों की संगति से मनुष्य के विचार शुद्ध होते हैं, जीवन में सदाचार आता है और हृदय में ईश्वर के प्रति श्रद्धा जागती है।
वहीं, प्रभु की कथा सुनने और उसमें प्रेमपूर्वक मन लगाने से भक्ति गहरी होती है और मन संसार की उलझनों से हटकर भगवान की ओर अग्रसर होता है।
संतों का संग जीवन को दिशा देता है और प्रभु की कथा उस दिशा को भक्ति में बदल देती है। यही भक्ति की वह राह है, जो मनुष्य को अंततः प्रभु के चरणों तक ले जाती है।