आदिशंकराचार्य ने मंडन मिश्र से शास्त्रार्थ में भारती को ही क्यों निर्णायक माना?
अनमोल मिथिला
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आदिशंकराचार्य ने मंडन मिश्र से शास्त्रार्थ में भारती को ही क्यों निर्णायक माना?
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अनमोल मिथिला
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आदिशंकराचार्य दूरदृष्टा थे। मंडन मिश्र के साथ उनके शास्त्रार्थ में अगर कोई अन्य निर्णायक भूमिका में होता तो हो सकता था वो पक्षपात करता। लेकिन जब उन्होंने भारती को इसके लिए प्रस्तावित किया तो वो मिथिला को मीमांसा दर्शन का पाठशाला स्वीकार करते हुए मिथिला को गौरवान्वित अनुभव कराया।