adhik mas30.05.2026 शुद्धाद्वैत पुष्टिमार्गीय द्वितीयपीठ स्थित प्रभु श्रीविट्ठलनाथजी मंदिर
raju bhai Nathdwara
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adhik mas30.05.2026 शुद्धाद्वैत पुष्टिमार्गीय द्वितीयपीठ स्थित प्रभु श्रीविट्ठलनाथजी मंदिर
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शुद्धाद्वैत पुष्टिमार्गीय द्वितीयपीठ स्थित प्रभु श्रीविट्ठलनाथजी मंदिर में आज राजभोग दर्शन के समय जुगलजोड़ी सरकार प्रभु श्रीविट्ठलनाथजी एवं श्रीस्वामिनीजी को चंदन चोली का मनोरथ आनंदपूर्वक अंगीकार कराया गया।
मंदिर के रत्नचौक में आम्र निकुंज की मनोहर सजावट की गई। आम्र-वृक्षों के भाव से सुसज्जित सुंदर बंगले में जुगलजोड़ी सरकार विराजमान हुए। प्रभु को चंदन चोली एवं केशरिया रंग के भीगे हुए वस्त्र धराए गए तथा चंदन चोली अंगीकार कराई गई। ठाकुरजी ने कलात्मक आभूषण धारण किए तथा छोगा एवं कमल के छोगा सुशोभित किए गए। निकुंज में आम्र-पल्लव एवं आम की डालियों की सजावट की गई। काष्ठ निर्मित गोपियों के श्रीमस्तक पर आम से भरी टोकरियाँ सजाई गईं, जिससे सम्पूर्ण वातावरण व्रज के आम्र निकुंज की अनुभूति करा रहा था।
मनोरथानुसार आम्र निकुंज के भावयुक्त कीर्तनों का मधुर गान किया गया तथा चारों ओर फुहारों की शीतल व्यवस्था की गई। पूज्य श्रीहरिरायजी बावा श्री ने राजभोग आरती की। द्वितीयपीठाधीश्वर पूज्यपाद गोस्वामी कल्याणरायजी महाराज श्री ने शंख-आरती कर वैष्णवों के ऊपर शंखजल का छिड़काव किया। केशरिया पंखों, केशरिया साज-सज्जा एवं अलौकिक वातावरण ने मनोरथ की शोभा को और अधिक बढ़ाया। दूर-दूर से पधारे वैष्णवों ने भी इस अद्भुत मनोरथ एवं दर्शनों का लाभ प्राप्त किया।
सायंकाल शयन दर्शन के समय प्रभु को मोर-कुटी मनोरथ में निज बगीचे के भाव से पधराया गया। मयूर सिंहासन पर जुगलजोड़ी सरकार विराजमान हुए। आसपास नृत्यरत मोरों की सजावट से युक्त गोपियाँ सुशोभित थीं। प्रभु को नीले एवं हरे रंग के मनोहर वस्त्र धराए गए तथा नृत्य करते हुए मोरों के भाव के सुंदर साज अंगीकार कराए गए। मोर-लीला के अनुरूप आकर्षक पिछवाई धराई गई। इस अवसर पर “अरी इन मोरन की पात देख नाचत गोपाला” आदि भावपूर्ण कीर्तनों का गान किया गया।
सायंकालीन मनोरथ की अनुपम छटा का लाभ लेने हेतु बड़ी संख्या में पधारे वैष्णवों ने प्रभु के दर्शनों का आनंद प्राप्त करा |