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(35)गीता माहात्म्य से प्रेरित कथा

sahitya darpan,,,,,📚

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(35)गीता माहात्म्य से प्रेरित कथा

75 просмотров · 8 дней назад
sahitya darpan,,,,,📚
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ग्यारहवें अध्याय — विश्वरूप दर्शन योग के पाठ का महात्म्य | गीता महात्म्य की विशेष प्रस्तुति भगवद्गीता के ग्यारहवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को अपने विराट एवं विश्वरूप का दर्शन कराते हैं। इसी कारण यह अध्याय “विश्वरूप दर्शन योग” के नाम से प्रसिद्ध है। इस विशेष प्रस्तुति में हम पहले ग्यारहवें अध्याय की महात्म्य-कथा के अंतिम प्रसंग को पूर्ण करते हैं और उसके बाद विशेष रूप से इस बात पर केंद्रित होते हैं कि शास्त्रीय महात्म्य-वर्णन में ग्यारहवें अध्याय के पाठ, श्रवण और चिंतन का क्या महत्व बताया गया है। महात्म्य में श्रीकृष्ण के कुरुक्षेत्र में दिए गए अमृतमय उपदेश को परम तात्त्विक ज्ञान के चिंतन का माध्यम बताते हुए इसे आध्यात्मिक कल्याण और मोक्षमार्ग से जोड़ा गया है। संसार-भय, अनेक प्रकार के दुःखों तथा जन्म-जन्मांतर के कष्टों से मुक्ति के संदर्भ में भी इसका महात्म्य वर्णित है। हमने इन बातों को ग्रंथ में वर्णित महात्म्य के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। इस वीडियो का उद्देश्य केवल कथा सुनाना नहीं, बल्कि कथा के भीतर निहित आध्यात्मिक भाव और जीवन-दृष्टि को सरल रूप में समझना है। साहित्य दर्पण, ज्ञानवाणी जहाँ कथाएँ केवल सुनी नहीं जातीं, समझी भी जाती हैं। 🙏 यदि आपको यह प्रस्तुति उपयोगी लगे तो वीडियो को लाइक करें, अपने प्रियजनों के साथ साझा करें और ऐसी ज्ञानवर्धक कथाओं के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें। शास्त्रीय आधार: प्रस्तुति भगवद्गीता के ग्यारहवें अध्याय तथा गीता-माहात्म्य में वर्णित प्रसंगों/भावों पर आधारित है। विभिन्न पाठ-परंपराओं में शब्दों या प्रसंगों में अंतर संभव है। महत्वपूर्ण सूचना: यह वीडियो धार्मिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान को सरल और व्याख्यात्मक रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से बनाया गया है। महात्म्य में वर्णित फल धार्मिक ग्रंथ-परंपरा के विश्वास एवं वर्णन के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं। #भगवद्गीता #विश्वरूपदर्शन #गीतामहात्म्य #गीता #श्रीकृष्ण #अर्जुन #गीता11वाअध्याय #आध्यात्मिकज्ञान #साहित्यदर्पण #ज्ञानवाणी