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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 | श्रीकृष्ण और अर्जुन का दिव्य संवाद | bhagavadgita I geeta

Gurukul Katha

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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 | श्रीकृष्ण और अर्जुन का दिव्य संवाद | bhagavadgita I geeta

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Gurukul Katha
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#bhagavadgita #geeta श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 | श्रीकृष्ण और अर्जुन का दिव्य संवाद | bhagavadgita I geeta श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 2 | सांख्य योग महाभारत के युद्धक्षेत्र में जब अर्जुन मोह और विषाद से व्याकुल होकर अपने शस्त्र रख देते हैं, तब भगवान श्रीकृष्ण उन्हें जीवन, आत्मा, कर्म, कर्तव्य और धर्म का गहन ज्ञान प्रदान करते हैं। गीता के दूसरे अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि आत्मा न जन्म लेती है और न कभी मरती है। मनुष्य को अपने कर्तव्य का पालन करते हुए कर्म के फल की आसक्ति से मुक्त रहना चाहिए। यह अध्याय श्रीमद्भगवद्गीता के मूल ज्ञान को समझने का महत्वपूर्ण आधार है, जिसमें आत्मज्ञान, कर्मयोग, समत्व और स्थितप्रज्ञ जैसे विषयों का विस्तार से वर्णन मिलता है। इस प्रस्तुति में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद को सरल, स्पष्ट और शुद्ध हिंदी में संवादात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है, ताकि गीता के संदेश को सहजता से समझा जा सके। श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 — सांख्य योग श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद जय श्रीकृष्ण। 0:00 रणभूमि में अर्जुन का मोह 0:31 गांडीव का त्याग और कर्तव्य का द्वंद्व 2:25 आत्मा का अमर सत्य 3:47 कर्म और फल का सिद्धांत 10:20 इच्छाओं और क्रोध का चक्र #bhagavadgita #geeta