बिन काज महाराज | BIN KAJ MAHARAJ
RAMCHANDRA GOYAL BHAJAN
0:00 / 0:00
बिन काज महाराज | BIN KAJ MAHARAJ
76 104 просмотра · 6 л. назад
RAMCHANDRA GOYAL BHAJAN
9,38 тыс. подписчиков
76 104 просмотра · 6 л. назад
बिन काज आज महाराज लाज गई मेरी ।
दुःख हरो द्वारिका नाथ शरण मैं तेरी ।टेर ।।
दुशासन वंश कुठार महा दुखदाई।
कर पकरत मेरो चीर लाज नहिं आई।
अब हुवा धर्म का नाश पाप रहयो छाई।
लखि अधम सभा की ओर नार बिलखाई ।।
शकुनी दुर्योधन कर्ण खड़े खल घेरी।। दुख हरो ।।१।।टेर ।।
तुम दीनन की सुधि लेत देवकी नन्दन।
है महिमा अमित अनन्त भक्त दुख भंजन ।
तुम किया सिया दुख दुर शंभु धनु खण्डन ।
अति आरत हरन गोपाल मुनिन मनरंजन।।
करूणा निघान भगवान करी क्यौं देरी।। दुख हरो ।।२।।
तुम सुनि गयंद की टेर विश्व अविनाशी ।
ग्राह मार छुटाई बंध कटि पग फाँसी।
मैं घर्यो तिहारो ध्यान द्वारिका वासी।
अब काहे राज समाज करावत हाँसी।।
अब कृपा करो यदुनाथ जानि चित चेरी।। दुख हरो ।। ३ ।।
तुम पतराखी प्रहलाद दीन दुख टारयो ।
भये खम्ब फाड़ नरसिंह असुर संहारियो ।
बन खेलत केशी आदि बकासुर मारियो ।
मथुरा मुष्टिक चाणूर कंस को मारियो ।।
पुनि माता पिता की जाय छुटाई बेड़ी। दुख हरो ।।४।।
भक्तन हित लिये अवतार कन्हाई तुमने ।
नल कूबर की जड़ जोनि छुड़ाई तुमने।
जल डूबत प्रभुता अगम दिखाई तुमने।
नख पर गिरि धार्यो ब्रज को बचाई तुमने।।
प्रभु अब विलम्ब क्यौं करो हमारी बेरी।। दुख हरो।।५।।
बैठे हैं राज समाज नीति सब खोई।
नहिं कहत धर्म की बात सभा में कोई।
पांचों पति बैठे मौन कौन गति होई।
ले नन्द नन्दन को नाम द्रोपदी रोई।।
कर कर विलाप संताप सभा में टैरी ।। दुख हरो।।६।।
सुनि दीन बंधु भगवान भक्त हितकारी ।
हरि भये चीर में आप हरियों दुख भारी ।
खैंचत हारियो मति मंद वीर बलकारी।
रख लई दीन की लाज आप बनवारी ।।
हरखत सुर, बरसत, सुमन बजावत भेरी ।। दुख हरो ।।७।।
क्या करी द्वारिकानाथ मनोहर माया ।
अम्बर का लगा पहाड़ अन्त नहिं आया।
तिहूं लोक चतुर्दश भुवन चीर दरशाया।
वन्दित गणेश प्रसाद कृष्ण गुणगाया।।
दीनन के दीनानाथ - विपत निरबेरी।। दुख हरो॥ ८ ॥
कवित्त-पाय अनुशासन दुःशासन करि कोप धायो।
द्रुपद सुता को चीर गहे भीर भारी है।।
भीष्म करण द्रोण बैठे ब्रत धारी तहाँ ।
कामिनी की और काहू नेक न निहारी है।।
सुनके पुकार धाये द्वारिका तें जदुराई।
बाढत दुकूल खेंचे भुज बल हारी है।।
सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है।
कि सारी ही की नारी है कि नारी ही की सारी है।
रामचंद्र जी गोयल के भजन-बिन काज महाराज
आशा है कि ये आपको पसंद आएगा।
1.like video
2.comment video
3.subscribe channel
4.share
Facebook- / ram-chandra-ji-goyal-bhajan-481756282173363
Twitter- / ramchandragoya5