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शरणदाता (कहानी)- अज्ञेय |UP Assistant Professor 2026 | हिंदी कहानी

अवनि पाण्डेय

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शरणदाता (कहानी)- अज्ञेय |UP Assistant Professor 2026 | हिंदी कहानी

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अवनि पाण्डेय
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शरणदाता' अज्ञेय जी की एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और मनोवैज्ञानिक कहानी है, जो देश के विभाजन के समय फैली हिंसा, अमानवीयता और संकट के बीच मानवीय संवेदनाओं के संघर्ष को उकेरती है। विभाजन का त्रास: कहानी लाहौर शहर की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहाँ आज़ादी और विभाजन की घोषणा के साथ ही हिंदू-मुसलमानों के बीच आपसी सौहार्द नफरत और डर में बदल जाता है। मित्रता और विवशता: लाहौर का एक हिंदू नागरिक देविन्दरलाल अपना घर छोड़कर जाने को विवश होता है, किंतु उसका मुस्लिम मित्र रफ़ीकुद्दीन उसे अपनी 'नाक' और सामाजिक प्रतिष्ठा का सवाल मानकर जबरन अपने यहाँ पनाह देता है। सुरक्षित ठिकाने की आड़ में द्वेष: स्थिति बिगड़ने पर रफ़ीकुद्दीन देविन्दरलाल को पुलिस विभाग में हेड क्लर्क 'शेख साहब' के घर गुप्त रूप से छिपाकर रहने भेजता है। उस घर का वातावरण सांप्रदायिक जहर से भरा होता है, जहाँ शेख साहब और उनका परिवार देविन्दरलाल को भोजन के माध्यम से परोक्ष रूप से नुकसान पहुँचाने की साजिश रचता है। जैबुन्निसा की मानवीय भूमिका: शेख साहब की बेटी जैबुन्निसा (जैबू) इस सांप्रदायिक मानसिकता से अलग खड़ी होती है। वह चुपचाप खाने में पर्ची रखकर देविन्दरलाल को सचेत कर देती है कि भोजन में जहर है। उसकी सूझबूझ और मानवीय करुणा के कारण देविन्दरलाल की जान बच जाती है।