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Bhagavad Gita Lectures: Chapter 1 Sloka 11 & 12 | Srila Prabhupada Lectures (Hindi)

Srila Prabhupada Hindi

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Bhagavad Gita Lectures: Chapter 1 Sloka 11 & 12 | Srila Prabhupada Lectures (Hindi)

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इस प्रवचन में कृष्णकृपामूर्ति श्री श्रीमद् ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद भगवद्गीता के प्रथम अध्याय के आलोक में क्षत्रिय-धर्म, वैदिक वर्ण-व्यवस्था तथा प्रकृति और समाज के संतुलन का विशद विवेचन कर रहे हैं। मुख्य विषय-बिंदु: १. पितामह भीष्म का शंखनाद — दुर्योधन का उत्साहवर्धन एवं युद्ध से पीछे न हटने का क्षत्रिय संकल्प। २. प्राचीन बनाम आधुनिक युद्ध-नीति — राजाओं एवं सेनापतियों द्वारा अग्रिम पंक्ति में आमने-सामने युद्ध करने का प्रामाणिक आदर्श। ३. वैदिक चातुर्वर्ण्य व्यवस्था — समाज के चारों वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) का पारस्परिक सामंजस्य एवं उत्तरदायित्व। ४. गो-रक्षा का राजकीय एवं सामाजिक महत्त्व — वैश्य-कर्म के अंतर्गत गो-संवर्धन एवं समाज की वास्तविक सुख-समृद्धि। ५. यज्ञ और प्रकृति का संबंध — 'यज्ञाद् भवति पर्जन्यः' के अनुसार वर्षा, अन्न-उत्पादन एवं अकाल निवारण का दैवी विधान। ६. कलि-युग में संकीर्तन-यज्ञ — वर्तमान समय में समस्त वैश्विक समस्याओं एवं संकटों के समाधान का एकमात्र साधन। शुद्ध वैदिक ज्ञान, सनातन संस्कृति एवं भगवद्-भावना के प्रसार हेतु चैनल को सब्सक्राइब करें तथा इस पावन संदेश को साझा करें। #SrilaPrabhupada #BhagavadGita #CowProtection #Iskcon