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बेहद खास है राजस्थान का बूंदी शहर | Travel | BUNDI

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बेहद खास है राजस्थान का बूंदी शहर | Travel | BUNDI

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ManakTv. बेहद खास है राजस्थान का बूंदी शहर राजस्थान में आपको कई ऐसी जगह देखने को मिल जाएंगी, अपनी खास खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं, उन्हीं में से एक है बूंदी शहर, जो जिला एक जिला है। बूंदी कोटा से लगभग 36 किमी दूर स्थित है जहां आपको एक से एक ऐतिहासिक जगहें देखने को मिल जाएंगी। जिनमें से एक है बूंदी में तारागढ़ किला- देश के पहले पहाड़ी किले के रूप में बूंदी में घूमने के स्थानों में प्रसिद्ध, यह किला 1354 में बनाया गया था। 1426 फुट ऊंचे इस विशाल निर्माण में बड़े-बड़े तीन प्रवेश द्वार हैं। अंदर आप चट्टान से उकेरे गए विशाल जलाशयों और रानियों को समर्पित रानी महल देख सकते हैं। भीम बुर्ज नामक सबसे बड़ी लड़ाई में एक विशाल तोप सीट है जिसे 'गर्भ गुंजन' या 'गर्भ से थंडर' कहा जाता है। किले में प्राचीन काल में दुश्मनों से बचने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कई सुरंगें भी हैं। बूंदी में चौरासी खंभों की छत्री- चौरासी खंबों की छत्री बूंदी में घूमने के लिए सबसे अद्भुत जगहों में से एक है। इसमें पहली मंजिल पर एक गुंबद है, जो छतरी या छतरी के आकार का है, जो 16 स्तंभों के सपोर्ट में खड़ा है। निचले स्तर पर 84 पद हैं। इतिहासकारों का दावा है कि 84 की संख्या पुनर्जन्म के चक्र को दर्शाती है जिसे मनुष्यों को मोक्ष तक पहुंचने से पहले गुजरना होगा। ऊँचे पोडियम पर खड़ी इस दो मंजिला संरचना के आधार पर नृत्य करने वाली मूर्तियों, हाथियों और हिरणों की नक्काशी के साथ एक शिवलिंग है। रानीजी की बाबड़ी- बूंदी में बावड़ियों की कमी नहीं है, उनमें से सबसे लोकप्रिय बावड़ी है रानी-जी-की-बावड़ी। 1699 में रानी नाथवती द्वारा निर्मित, यह भारत में सबसे बड़े और सबसे अच्छी तरह से संरक्षित बावड़ियों में से एक है। अगर आप बूंदी जा रहे हैं, तो इस जगह पर भी घूमने जरूर जाए। 300 साल पुराना यह निर्माण 46 मीटर गहरा है और इसमें टेढ़े-मेढ़े नक्काशियों वाले स्तंभ हैं। विशाल द्वार या तोरण में बूंदी के विशिष्ट भित्ति चित्र हैं। सुख महल- जैत सागर झील की मुख्य पाल पर यह सुख महल बना हुआ है. इसका निर्माण राजा विष्णु सिंह ने अपने मेहमानों के ठहरने के लिए कराया था. इस भवन में अंग्रेज अधिकारी और लेखक रुडयार्ड किपलिंग ठहरे थे. इस कारण इसे किपलिंग पैलेस भी कहते हैं. वर्तमान में यह पुरातत्व विभाग के अधिकार में है. विभाग के द्वारा अब इसे संग्राहलय बना दिया गया है. इसमें अस्त्र शस्त्र दीर्धा, चित्रकला खंड व मूर्ति कला खंड भी निर्धारित हैं नवल सागर झील- यह गढ़ पैलेस के सामने स्थित सुंदर झील है. इसमें बारिश का पानी एकत्र होता है. रात के समय इसके पानी में गढ़ पैलेस का खूबसूरत प्रतिबिम्ब दिखाई देता है. इस झील के बीच में एक मंदिर भी आकर्षण का केंद्र है जैत सागर जैत सागर बूंदी की एक महत्त्वपूर्ण झील है। यह बूँदी शहर के उत्तर पूर्व में शहर से करीब 1 किलोमीटर पहाड़ की तलहटी में स्थित है। पहाड़ों के मध्य झूला झूलती प्रतीत होती इस झील को बूँदी के राजा जैता मीणा ने बनवाया था जिसका जीर्णोद्धार राव राजा सुरजन सिंह की माता रानी जयवंती ने करवाया था। इसके बाद इसका पुनरुद्धार राव राजा विष्णु सिंह के कारीगर सुखराम ने कराया और इसके निकट ग्रीष्म ऋतु में शाही परिवार के रहने के लिए 'सुखमहल' नामक विश्रामगाह भी बनवाया, जिसमें विश्वविख्यात लेखक रुड्यार्ड किपलिंग अपने भारत प्रवास के दौरान ठहरे थे। इसे बड़ा तालाब भी कहते हैं। यह झील 4455 हैक्टेयर भूमि में फैली है। 1995 तक यह झील ताजा पानी का स्रोत थी। इस झील में लगे फव्वारे के चलने पर झील का झिलमिलाता पानी अत्यंत आकर्षक व मनोहारी लगता है। क्षार बाग- ये राजाओं का अंतिम स्थल है । यहां छोटी, बड़ी छतरियों की पूरी शृंखला है। राजाओं की छतरियों में विशाल शिवलिंग हैं, इन छतरियों का शिल्प अदभुत हैे, पूरे राजस्थान में ऐसा क्षार बाग कहीं ओर नहीं है लक्खी बुर्ज से सटा क्षार बाग हाड़ा शासकों का अंतिम विश्राम स्थल है. यहां 17वीं से 20वीं शताब्दी तक के शासकों की स्मृति के रूप में छतरियां और चबूतरे बने हैं. ये छतरियां रियासतकालीन स्थापत्य का सुंदर नमूना है. कोटा रियासत के दिवंगत राजाओं की याद में बनी छतरियां. ऐसी छतरी जिसका वर्णन बहुत कम लोगो को मालूम है। चौथ माता का मंदिर भारत में बहुत से प्राचीन मंदिर हैं. उनमें से एक है बूंदी का चौथ माता का मंदिर,जहां पहुंचने के लिए लगभग 250 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है. मान्यता है कि यहां दर्शन और पूजन करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है. साथ ही सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है. इस मंदिर से जुड़ी आस्था के चलते यह देश भर में प्रसिद्ध है। वैसे तो इस मंदिर में माता के दर्शन के लिए रोजाना भक्त आते रहते हैं, लेकिन करवा चौथ के दिन यहां भक्तों का तांता लगा रहता है. यहां करवा चौथ, भाद्रपद चौथ, माघ चौथ और लक्खी मेला भी लगता है, जिसमें भाग लेने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते है। Vo- Ashok Swami