60 से 70 दिन की धान में भूलकर भी ना करें ये गलतियां | धान की देखभाल की 10 महत्वपूर्ण बातें SRJ KHETI
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60 से 70 दिन की धान में भूलकर भी ना करें ये गलतियां | धान की देखभाल की 10 महत्वपूर्ण बातें SRJ KHETI
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नमस्कार किसान भाइयों, मैं सूरज कुमार सिंह, आपके अपने यूट्यूब चैनल SRJ KHETI पर आपका स्वागत करता हूँ।
धान की फसल जब 60 से 70 दिन की हो जाती है, यानी गभोट (गाभे) की अवस्था में होती है, तो यह समय बहुत ही नाजुक होता है। इस अवस्था में की गई एक छोटी सी गलती भी पैदावार को भारी नुकसान पहुँचा सकती है। इस वीडियो में मैंने 10 ऐसी महत्वपूर्ण बातें बहुत ही विस्तार से बताई हैं, जिनका ध्यान रखकर आप अपनी धान की बालियों का शानदार विकास कर सकते हैं और बंपर पैदावार ले सकते हैं।
धान की देखभाल के 10 महत्वपूर्ण बिंदु:
1. यूरिया का प्रयोग भूलकर भी न करें:
इस समय नाइट्रोजन (यूरिया) देने से फसल में बीमारियां और कीटों का अटैक बहुत ज्यादा होता है। पौधे की लंबाई अनावश्यक रूप से बढ़ सकती है जिससे फसल गिरने का खतरा रहता है।
2. खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें:
इस अवस्था में खेत में दरारें बिल्कुल नहीं पड़नी चाहिए। अगर नमी की कमी होगी, तो बालियों का विकास अच्छे से नहीं हो पाएगा और दानों का भराव प्रभावित होगा।
3. NPK 0-52-34 का इस्तेमाल करें:
गाभे की अवस्था में एनपीके 0-52-34 का स्प्रे करना बहुत फायदेमंद होता है। इससे पौधे को फास्फोरस और पोटाश मिलता है। इसकी 1 से डेढ़ (1.5) किलो मात्रा प्रति एकड़ के हिसाब से प्रयोग करें।
4. बोरॉन (20%) का सही प्रयोग:
बालियों में अच्छे परागण (Pollination) के लिए 20% वाले बोरॉन का इस्तेमाल जरूर करें। इसकी मात्रा 100 से 125 ग्राम प्रति एकड़ ही रखें, बोरॉन की अधिक मात्रा फसल को नुकसान पहुँचा सकती है, इसलिए डोज का विशेष ध्यान रखें।
5. खरपतवार नाशक दवाओं से बचें:
इस समय कोई भी खरपतवार नाशी या हाई डोज वाली दवा न डालें। इससे पौधे को झटका लगता है, जिससे उसकी ग्रोथ एकदम से रुक जाती है और बालियों के निकलने में भारी दिक्कत आती है।
6. दवाओं का कॉकटेल न बनाएं:
कई बार हम फफूंदनाशी, कीटनाशी, एनपीके, बोरॉन और जिंक सब एक साथ मिला देते हैं। ऐसा करने से दवा का असर बहुत कम हो जाता है। बहुत सारी चीजें एक साथ मिलाने से बचें। हमेशा दवाओं का घोल पहले टेस्ट करें और क्रम-क्रम से चीजों का प्रयोग करें।
7. दानेदार या पाउडर वाले ग्रोथ प्रमोटर न डालें:
इस समय मिट्टी में डाले जाने वाले दानेदार या पाउडर वाले ग्रोथ प्रमोटर का इस्तेमाल करना केवल पैसे की बर्बादी है। अगर आपको बहुत आवश्यकता महसूस हो, तभी सागरिका जैसे लिक्विड प्रमोटर का स्प्रे करें, अन्यथा इससे बचें।
8. बीमारियों और कीटों की निगरानी (सटीक इलाज):
खेत की निगरानी करते रहें। इस समय गोभ की सुंडी (तना छेदक), ब्लास्ट और शीथ ब्लाइट का असर देखने को मिल सकता है।
गोभ की सुंडी के लिए: कार्ट्राप हाइड्रोक्लोराइड 50% SP की 400 ग्राम मात्रा 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करें।
शीथ ब्लाइट और ब्लास्ट फंगस के लिए: आप 'कस्टोडिया' (एजोक्सिस्ट्रोबिन 11% + टेबुकोनाजोल 18.3% SC) 300 ml प्रति एकड़ इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा सिंजेंटा की 'एमिस्टार टॉप' (एजोक्सिस्ट्रोबिन 18.2% + डाईफेनोकोनाजोल 11.4% SC) 200 ml प्रति 200 लीटर पानी में, या फिर बायर की 'नेटिवो' (पाउडर फॉर्म) 80 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे कर सकते हैं। पाउडर वाली दवा को पहले अच्छे से घोल लें।
9. ऑर्थोसिलिसिक एसिड (2%) का कमाल:
यह फसल को रस चूसक कीटों और फंगस से बचाता है। इसके इस्तेमाल से पत्तियों के ऊपर एक दोहरी परत जम जाती है, जिससे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) बहुत बेहतर होता है। पत्तियां चौड़ी और एकदम खुली-खुली रहती हैं। 150 से 200 लीटर पानी में इसकी 300 से 400 ml मात्रा (2ml/लीटर पानी) मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करें।
10. चिलेटेड जिंक (12%) का उपयोग:
बालियों के बेहतरीन निर्माण के लिए जब आप NPK 0-52-34 और बोरॉन डाल रहे हों, तो अलग से घोल बनाकर 100 ग्राम 12% वाली चिलेटेड जिंक का इस्तेमाल जरूर करें। इससे बालियों का विकास बहुत ही शानदार होगा।
किसान भाइयों, उम्मीद है आपको यह विस्तृत जानकारी पसंद आई होगी। खेती से जुड़ी ऐसी ही सही और सटीक जानकारी के लिए वीडियो को लाइक करें और अपने चैनल SRJ KHETI को सब्सक्राइब जरूर करें।
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह वीडियो केवल किसानों की जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से बनाया गया है। किसी भी रासायनिक खाद, कीटनाशक, फफूंदनाशक या अन्य कृषि दवाओं का प्रयोग करने से पहले निर्माता कंपनी द्वारा पैकेट पर दिए गए दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और सभी सुरक्षा सावधानियों का पालन करें। दवाओं के मिश्रण या प्रयोग से फसल, मिट्टी या व्यक्ति को होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान के लिए SRJ KHETI चैनल या वीडियो निर्माता जिम्मेदार नहीं होंगे। अपनी फसल और मौसम की स्थिति के अनुसार किसी स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
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