Dewas Tekri Darshan 2021| देवास टेकरी दर्शन | मां तुलजा भवानी, मां चामुण्डा
Vipin Singh Bhadauria
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Dewas Tekri Darshan 2021| देवास टेकरी दर्शन | मां तुलजा भवानी, मां चामुण्डा
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Vipin Singh Bhadauria
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Dewas Tekri Ke Darshan 2021 Dewas Mata Mandir Maa Chamunda Maa Tulja Bhavani
मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में देवास शहर में देवी का प्रसिद्ध धाम स्थापित है। देवास का यह शक्तिपीठ इंदौर से करीब 34 किमी दूर है। ऊंची पहाड़ी पर स्थित माता का यह भवन देशभर में प्रसिद्ध है। इसकी अनोखी प्रसिद्धि का कारण यहां विराजमान दो बहनें हैं। जी हां, माता के इस अनोखे दरबार में दो देवीयां विराजमान हैं। यहां माँ तुलजा भवानी और माँ चामुंडा देवी विराजमान है। इस मंदिर को टेकरी के नाम से जाना जाता है और कहा जाता है की यहां देवी मां का रक्त गिरा था। इसलिए यहां मां चामुण्डा का प्रकाट्य यहां स्थापित हुआ है।अनादि काल से स्थापित इस मंदिर में दूर-दुर से भक्त माता के दर्शन करने आते हैं। लोगों की मान्यताओं के अनुसार यहां देवी के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति के वारे-न्यारे हो जाते हैं। यहां देवी मां दो स्वरुपों में विराजमान है कहा जाता है की ये दोनों ही देवियां जाग्रत अवस्था में हैं। लोगों की आस्था इतनी है की उनका कहना है माँ तुलजा भवानी और माँ चामुंडा देवी से जो भी मुराद मांगी जाती है वह पुरी जरुर होती है। लोग यहां अपनी मनौतियां लेकर दूर दूर से आते हैं और पूरी होने का आशीर्वाद लेकर जाते हैं। माता के दोनों ही स्वरुपों को छोटी मां व बड़ी मां के नाम से जाना जाता है। तुलजा देवी को बड़ी माता और चामुंडा देवी को छोटी माता कहा जाता है। यहां पर लोगों का मानना है की भैरो बाबा के दर्शन अनिवार्य है और उसके बिना प्राथना अधूरी है, इसीलिए लोग बड़ी माँ और छोटी माँ के साथ भैरो बाबा के भी दर्शन करते है।यूं तो सालभर ही यहां भक्तों की भीड़ नज़र आती है लेकिन नवरात्रि के पावन पर्व पर पूरे नौ दिनों तक यहां भक्तों का तांता लग जाता है। कई भक्त तो यहां हर रोज़ माथा टेकने आते हैं। नवरात्र के दिनों में यहां पर एक विशेष पूजा कराई जाती है। जिसके लिए लोग लंबी लाइनों में लगे रहते हैं। इस मंदिर पर आप दो तरह से जा सकते है या तो आप सीढ़ियों से जिनकी संख्या लगभग 410 है या पक्की रोड से जो पहाड़ी से होते हुए मंदिर की ओर जाती है। आप रोप-वे की सहायता से भी मां के दर्शन करने जा सकते हैं। नवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं। जिससे की लोगों को कोई असुविधा ना हो।
मंदिर की पौराणिक कथा
इस मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि बड़ी मां और छोटी मां के बीच बहनों का रिश्ता था। यहां दोनों माताएं संग में रहती थी। एक दिन किसी बात पर दोनों बहनों में विवाद हो गया और यह बढ़ता गया जिसके चलते दोनों ही माताएं अपना अपना स्थान छोड़कर जाने लगी। बड़ी मां पाताल में समाने लगी और छोटी मां अपना स्थान छोड़कर खड़ी हो गई और टेकरी से जाने लगीं, तभी माताओं को कुपित देख कर उनके साथी हनुमानजी और भैरो बाबा ने उनको क्रोध शांत करने और वहीं रुकने कि विनती करी। दोनों ही माताएं जैसी थी वैसी ही रुक गई बड़ी माता का आधा शरीर पाताल में समा चूका था। तो वो जैसी स्थिति में थी वैसी ही टेकरी पर रुक गईं और छोटी माता टेकरी से उतर रही थी। उनका मार्ग अवरुद्ध होने के कारण वे और कुपित हो गई और जिस अवस्ता में वे नीचे उतर रही थीं, उसी में वे टेकरी पर विराजमान हो गईं।
कैसे पहुंचे देवास टोकरी
हवाई मार्ग- यहां का निकटतम हवाई अड्डा मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में स्थित है। यहां से आप बस, टैक्सी से आसानी से जा सकते हैं।
सड़क मार्ग- यह शहर राष्ट्रीय राजमार्ग आगरा-मुंबई से जुड़ा हुआ है। यह मार्ग माता की टेकरी के नीचे से ही गुजरता है। इसके निकटतम बड़ा शहर इंदौर है, जो यहाँ से मात्र 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इंदौर से आप बस या टैक्सी लेकर देवास जा सकते हैं।
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