नवरात्र में सरल व लघु विधि से स्वयं कैसे हवन करें?(अष्टमी/नवमी), कठिन मंत्रो के बिना,पर पूर्ण विधि |
सनातन धर्म के जीवन सूत्र (Shrividya Forest School)
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नवरात्र में सरल व लघु विधि से स्वयं कैसे हवन करें?(अष्टमी/नवमी), कठिन मंत्रो के बिना,पर पूर्ण विधि |
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सनातन धर्म के जीवन सूत्र (Shrividya Forest School)
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नवरात्रि के पावन पर्व पर अष्टमी-नवमी तिथि को हवन करने का विशेष महत्व है अत: अगर आप घर पर ही सरल रीति से हवन करना चाहते है तो आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। हम आपके लिए लेकर आए हैं आसान तरीके हवन करने की विधि। इस सरल हवन विधि द्वारा आप अपने पूरे परिवार के साथ यज्ञ-हवन करके नवरात्रि पूजन को पूर्णता प्रदान कर सकते हैं।
कितना बड़ा हो हवन कुंड ?
प्राचीनकाल में कुंड चौकोर खोदे जाते थे। उनकी लंबाई, चौड़ाई समान होती थी। यह इसलिए कि उन दिनों भरपूर समिधाएं प्रयुक्त होती थीं। घी और सामग्री भी बहुत-बहुत होमी जाती थी, फलस्वरूप अग्नि की प्रचंडता भी अधिक रहती थी। उसे नियंत्रण में रखने के लिए भूमि के भीतर अधिक जगह रहना आवश्यक था। उस स्थिति में चौकोर कुंड ही उपयुक्त थे। पर आज समिधा, घी, सामग्री सभी में अत्यधिक महंगाई के कारण किफायत करती पड़ती है।
ऐसी दशा में चौकोर कुंडों में थोड़ी ही अग्नि जल पाती है और वह ऊपर अच्छी तरह दिखाई भी नहीं पड़ती। ऊपर तक भरकर भी वे नहीं आते तो कुरूप लगते हैं। अतएव आज की स्थिति में कुंड इस प्रकार बनने चाहिए कि बाहर से चौकोर रहें। लंबाई-चौड़ाई, गहराई समान हो।
हवन के धुएं से प्राण में संजीवनी शक्ति का संचार होता है। हवन के माध्यम से बीमारियों से छुटकारा पाने का जिक्र ऋग्वेद में भी है।
हवन की सामग्री
हवन के लिए आम की लकड़ी, बेल, नीम, पलाश का पौधा, कलीगंज, देवदार की जड़, गूलर की छाल और पत्ती, पीपल की छाल और तना, बेर, आम की पत्ती और तना, चंदन की लकड़ी, तिल, जामुन की कोमल पत्ती, अश्वगंधा की जड़, तमाल यानी कपूर, लौंग, चावल, ब्राम्ही, मुलैठी की जड़, बहेड़ा का फल और हर्रे तथा घी, शकर जौ, तिल, गुगल, लोभान, इलायची एवं अन्य वनस्पतियों का बूरा उपयोगी होता है। जो भी आपको उपलब्ध हो , उनका प्रयोग करें।
हवन के लिए गाय के गोबर से बनी छोटी-छोटी कटोरियां या उपले घी में डुबोकर डाले जाते हैं। हवन से हर प्रकार के 94 प्रतिशत जीवाणुओं का नाश होता है, अत: घर की शुद्धि तथा सेहत के लिए प्रत्येक घर में हवन करना चाहिए। हवन के साथ कोई मंत्र का जाप करने से सकारात्मक ध्वनि तरंगित होती है, शरीर में ऊर्जा का संचार होता है अत: कोई भी मंत्र सुविधानुसार बोला जा सकता है।
ऐसे करें हवन :
हवन करने से पूर्व स्वच्छता का ख्याल रखें। सबसे पहले रोज की पूजा करने के बाद अग्नि स्थापना करें फिर आम की और जो भी उपलब्ध समिधा (सूखी लकड़ी) लगाकर, कपूर रखकर जला दें। उसके बाद इन मंत्रों से हवन शुरू करें।
ॐ आग्नेय नम: स्वाहा (ॐ अग्निदेव ताम्योनम: स्वाहा), ॐ गणेशाय नम: स्वाहा ( गणेशजी 8 अन्य आहुति ),
ॐ गौरियाय नम: स्वाहा,
गुरु मंत्र की आहुति अथवा
ॐ गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवा महेश्वर: गुरु साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा
ॐ नवग्रहाय नम: स्वाहा
ॐ ब्रह्मामुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि: भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शक्रे शनि राहु केतो सर्वे ग्रहा शांति करा भवन्तु: स्वाहा
( हर ग्रह के लिए अलग से मन्त्र की आहुति भी कर सकते हैं),
यह आहुति भी कर सकें तो कर लीजिये -
ॐ दुर्गाय नम: स्वाहा,
ॐ महाकालिकाय नम: स्वाहा,
ॐ महालक्ष्यमये नम: स्वाहा,
ॐ महासरस्वत्यै नम: स्वाहा,
ॐ हनुमते नम: स्वाहा,
ॐ भैरवाय नम: स्वाहा,
ॐ कुल देवताय नम: स्वाहा
ॐ कुलदैव्य नमः स्वाहा,
ॐ स्थान देवताय नम: स्वाहा,
ॐ ब्रह्माय नम: स्वाहा,
ॐ विष्णुवे नम: स्वाहा,
ॐ शिवाय नम: स्वाहा,
ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी
दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते स्वाहा,
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंम् पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् मृत्युन्जाय नम: स्वाहा,
ॐ शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे,
सर्व स्थार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते।
108 आहुति नवार्ण मन्त्र की ,
माताजी के नामों की ,
जप मन्त्र की,
कोई विशिष्ट कामना पूर्ति मन्त्र,
श्री दुर्गा सप्तशती से कोई प्रिय मन्त्र
हवन के बाद सुपारी अथवा गोला में कलावा बांधकर फिर चाकू से काटकर भीतर के भाग में घी व शक्कर भरकर चढ़ा दें जिसको वोलि कहते हैं। फिर पूर्ण आहूति नारियल में छेद कर घी भरकर, लाल तूल लपेटकर धागा बांधकर पान, सुपारी, लौंग, जायफल, बताशा, अन्य प्रसाद रखकर पूर्ण आहुति मंत्र बोले- 'ॐ पूर्णमद: पूर्णमिदम् पुर्णात पूर्ण मुदच्यते, पुर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवा वा शिस्यते स्वाहा।'
पूर्ण आहुति के बाद यथाशक्ति दक्षिणा माता के पास रख दें, फिर परिवार सहित आरती, परिक्रमा , पुष्पांजलि, अर्पण , प्रार्थना करके अपने द्वारा हुए अपराधों के लिए क्षमा-याचना करें, क्षमा मांगें फिर विसर्जन की प्रार्थना करें।
इस तरह आप सरल रीति से घर पर हवन संपन्न कर सकते हैं |