पितृपक्ष कब से, भोजन में क्या ना बनाएं क्या ना बनाएं,श्राद्ध कौन कर सकता है और किसे नहीं करना चाहिए?
Laddugopal ki seva Gyan bhakti
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पितृपक्ष कब से, भोजन में क्या ना बनाएं क्या ना बनाएं,श्राद्ध कौन कर सकता है और किसे नहीं करना चाहिए?
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पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण के साथ ब्राह्मण भोज और अतिथि सत्कार की भी परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध का भोजन किसे कराया जाए और किसे नहीं इसका भी विशेष महत्व बताया गया है. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि धर्मग्रंथों में कुछ लोगों को श्राद्ध भोजन के लिए आमंत्रित करने से मना किया गया है. जबकि योग्य अतिथि के बिना बुलाए घर आने पर उसका सम्मान करने और भोजन कराने की परंपरा बताई गई है.
किन लोगों को नहीं कराना चाहिए श्राद्ध का भोजन
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि विष्णु स्मृति में छल-कपट करने वाले, चोरी करने वाले, दूसरों का अहित करके अपना स्वार्थ साधने वाले और माता-पिता या गुरु के प्रति अनुचित आचरण करने वाले लोगों को श्राद्ध भोजन के लिए आमंत्रित न करने की बाात कही गई है. धार्मिक कार्यों और धर्म के विरुद्ध आचरण करने वालों को भी श्राद्ध भोजन के लिए अपात्र बताया गया है. मार्कण्डेय पुराण और नारद पुराण में भी श्राद्ध के लिए अपात्र लोगों का उल्लेख मिलता है.सिर्फ ब्राह्मणों तक सीमित नहीं है श्राद्ध भोजन
धर्मशास्त्रीय परंपराओं में श्राद्ध भोजन को केवल ब्राह्मणों तक सीमित नहीं बताया गयाा है. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि मामा, नाना पक्ष के संबंधियों और गुरु को भी श्राद्ध भोजन में शामिल करने का उल्लेख मिलता है. भांजे-भांजियों को भोजन कराने की भी परंपरा कई जगह बतााई गई है.
श्राद्ध के भोजन में कैसी होनी चाहिए शुद्धता
श्राद्ध में सिर्फ भोजन करने वाले व्यक्ति का ही नहीं, बल्कि भोजन की शुद्धता और तैयारी का भी महत्व माना गया है. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि धार्मिक परंपरा में शुद्ध जल से ताजाा भोजन तैयार करने पर जोर दिया गया है. श्राद्ध के भोजन में आमतौर पर लहसुन-प्याज का इस्तेमाल नहीं किया जाताा और भोजन सात्विक रखा जाता है.