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Ravikant बौद्ध
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Ravikant बौद्ध
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डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के 1916 के विश्लेषण में ब्राह्मण वर्ग की भूमिका को पिछले चार दिनों में हमने समझा कि बाबासाहेब के अनुसार जाति को समझने की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी अंतर्विवाह (Endogamy) है।
उनके शोधपत्र का एक बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आता है
अगर जाति एक बंद विवाह-व्यवस्था है, तो यह बंद व्यवस्था सबसे पहले कहाँ से शुरू हुई?
1916 के अपने शोधपत्र Castes in India: Their Mechanism, Genesis and Development में बाबासाहेब ने तर्क दिया कि पुरोहित/ब्राह्मण वर्ग ने सबसे पहले अपने आपको एक बंद, अंतर्विवाही समूह के रूप में संगठित किया।
उनके अनुसार बाद में अन्य सामाजिक समूहों ने इस बंद व्यवस्था का अनुकरण (imitation) किया और वे भी धीरे-धीरे अंतर्विवाही जातियों में बदलते गए। यह बाबासाहेब की अपनी ऐतिहासिक व्याख्या थी।
“Endogamy or the closed-door system … had originated from the Brahmin caste”
बाबासाहेब ने “अनुकरण” को महत्वपूर्ण क्यों माना?
उनका तर्क था कि किसी सामाजिक व्यवस्था का अनुकरण तभी तेजी से फैल सकता है जब जिस समूह से उसका अनुकरण किया जा रहा है, उसे समाज में प्रतिष्ठा और प्रभाव प्राप्त हो। 1916 के अपने शोधपत्र में बाबासाहेब ने ब्राह्मणों की सामाजिक प्रतिष्ठा को इसी संदर्भ में रखा और कहा कि अन्य समूहों ने उनके बंद विवाह-व्यवहार का अनुकरण किया।
उन्होंने कहा कि—
“Caste in the singular number is an unreality. Castes exist only in the plural number.”
अर्थात उनके अनुसार जाति व्यवस्था को समझने के लिए एक जाति को अलग करके नहीं, बल्कि अनेक जातियों के पूरे तंत्र के रूप में देखना आवश्यक है।
डॉ.बाबासाहेब ने अपने शोधपत्र में यह भी लिखा कि प्रारंभिक सामाजिक वर्गों में “open-door character” था—अर्थात वर्ग और जाति को वे एक ही चीज नहीं मान रहे थे।
उनके अनुसार ऐतिहासिक प्रक्रिया में कुछ सामाजिक वर्ग स्वयं को बंद करने लगे, जबकि कुछ दूसरे समूह ऐसी बंद व्यवस्था के कारण बाहर से बंद किए गए।
डॉ.बाबासाहेब केवल यह नहीं पूछ रहे थे कि—
“जातियाँ कितनी हैं?”
वे इससे कहीं गहरा प्रश्न पूछ रहे थे—
“जाति एक बंद व्यवस्था बनी कैसे और फिर वह पूरे समाज में फैली कैसे?”
उनके उत्तर में तीन महत्वपूर्ण शब्द सामने आते हैं:
अंतर्विवाह (Endogamy)
⬇️
बंद सामाजिक समूह
⬇️
अनुकरण और सामाजिक बहिष्करण
⬇️
जाति व्यवस्था का विस्तार इसी तरह एक समाज का दूसरे समाज का अनुकरण करने में जाति व्यवस्था मजबूत बनी।
जय भीम ।
नमो बुद्धाय।
जय जोहार।
जय मूलनिवासी।