पापा जाँघे बैठलन दुलरईतीन बेटी, भइया निरखे मुँह | फूलवा अइसन मुँहवा ये बहिनी | मगही बेटी विवाह गीत
Aruhi Ke Lok Geet
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पापा जाँघे बैठलन दुलरईतीन बेटी, भइया निरखे मुँह | फूलवा अइसन मुँहवा ये बहिनी | मगही बेटी विवाह गीत
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💐❤️ मगही बेटी विवाह गीत | बेटी के दुलार आ परिवार के प्यार ❤️💐
प्रस्तुत है हमर माटी आ हमर मगही बोली से जुड़ल एक सुंदर भावुक बेटी विवाह गीत। ई गीत में पापा के दुलार, भइया के अपनापन आ बहिनी के सुंदरता के फूल से तुलना कइल गेल हइ। 🌺🎶
🎵 गीत के बोल:
पापा जाँघे बैठलन, दुलरईतीन बेटी,
भइया निरखे मुँह।
फूलवा अइसन मुँहवा ये बहिनी,
काहे कइला मलिन? 💐❤️
बेटी के विवाह के प्यार, दुलार आ भावनात्मक माहौल से भरल ई मगही लोकगीत जरूर सुनीं आ अपना परिवार के साथ साझा करीं। 🥹🌸
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🌾 हमर माटी | हमर बोली | हमर लोकगीत 🎶
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