जीवन एक जंग है! हार मानकर मैदान मत छोड़ना || आचार्य प्रशांत
ललकार
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जीवन एक जंग है! हार मानकर मैदान मत छोड़ना || आचार्य प्रशांत
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वीडियो जानकारी: 16.08.2025, भगवद् गीता सत्र, गोवा
Title: जीवन एक जंग है! हार मानकर मैदान मत छोड़ना || आचार्य प्रशांत
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विवरण: इस वीडियो में आचार्य प्रशांत जी बताते हैं कि क्यों पुरानी आदतें और यादें—जिन्हें हम मसल मेमोरी कहते हैं—पूरी तरह मिटती नहीं। चेतना तुरंत बदल सकती है, लेकिन शरीर अतीत को सोखकर बैठा रहता है। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि आध्यात्मिक जीवन सफ़ेद वस्त्रों में बादलों पर चलने की यात्रा नहीं, बल्कि एक वास्तविक युद्ध है। इस युद्ध में गिरना, चोट खाना और हारते हुए दिखना—सब स्वाभाविक है। गिरने का अर्थ हारना नहीं, बल्कि फिर से उठ खड़े होना है। यह सत्र उन लोगों के लिए है जो समझना चाहते हैं कि साधना में आने वाली अस्थिरता से कैसे जूझकर आगे बढ़ा जाए।
उथल-पुथल होगी, उठोगे भी, गिरोगे भी, मैदान मत छोड़ना!
गिर गए तो फिर खड़े हो जाओ।
गिरने को हार मत मान लेना।
आध्यात्मिक प्रक्रिया जंग जैसी होती है।
मुश्किल है, पर कोई बात नहीं। जी लेंगे।
अतीत पीछे खींचेगा, तुम्हें आगे बढ़ना है।
जो अतीत करवा रहा है, अगर वही कर रहे हो, तो मामला गड़बड़ है।
पुरानी आदतें लौटें, तो निराश मत हो जाना।
उठते रहो, पिटते रहो।
संघर्ष के बीच भी आगे बढ़ते रहो।
🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर:
https://open.spotify.com/show/3f0KFwe...
संगीत: मिलिंद दाते
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