सोमवार के दिन शिव जी को क्यों पूजा जाता है? | हर हर महादेव | जय शिव
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सोमवार के दिन शिव जी को क्यों पूजा जाता है?
हिंदू धर्म में भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है। शिव जी की पूजा सप्ताह के सभी दिनों में की जाती है, लेकिन सोमवार का दिन भगवान शिव को विशेष रूप से समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि सोमवार के दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने से मनुष्य को शांति, धैर्य और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सोमवार का दिन ही भगवान शिव की पूजा के लिए इतना विशेष क्यों माना गया है? इसके पीछे कई धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं।
चंद्रमा और भगवान शिव की कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रमा को भगवान शिव से विशेष संबंध रखने वाला माना जाता है। भगवान शिव ने अपने मस्तक पर चंद्रमा को धारण किया हुआ है। इसी कारण उन्हें "चंद्रशेखर" और "सोमेश्वर" जैसे नामों से भी
जाना जाता है।
एक प्रचलित कथा के अनुसार, प्रजापति दक्ष की अनेक पुत्रियां थीं। उनका विवाह चंद्रदेव से हुआ था। चंद्रमा की सभी पत्नियों में रोहिणी उन्हें सबसे अधिक प्रिय थीं। इस कारण चंद्रमा अन्य पत्नियों की अपेक्षा रोहिणी को अधिक महत्व देते थे।
जब दक्ष को यह बात पता चली तो उन्होंने चंद्रमा को शाप दे दिया कि उनका तेज धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगा।
शाप के कारण चंद्रमा का प्रकाश कम होने लगा। देवता और ऋषि भी चिंतित हो गए। चंद्रमा ने अनेक उपाय किए, लेकिन उनका संकट दूर नहीं हुआ।
अंत में चंद्रदेव भगवान शिव की शरण में पहुंचे।
उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की और पूरी श्रद्धा से महादेव का ध्यान किया। चंद्रमा की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव उनके सामने प्रकट हुए। भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण कर लिया और उन्हें अपना संरक्षण दिया।
इसी कारण भगवान शिव के मस्तक पर अर्धचंद्र दिखाई देता है।
इस कथा के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि जब मनुष्य अहंकार छोड़कर सच्चे मन से भगवान की शरण में जाता है, तो भगवान उसकी रक्षा अवश्य करते हैं। सोमवार और सोम का संबंध
संस्कृत में चंद्रमा को 'सोम' भी कहा जाता है। इसी कारण सोमवार का संबंध चंद्रमा से माना जाता है। भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर स्थान दिया है, इसलिए सोमवार को शिव पूजा के लिए विशेष माना जाता है।
भक्त सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और
फूल अर्पित करते हैं। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। लेकिन भगवान शिव की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण चीज
केवल पूजा की सामग्री नहीं, बल्कि भक्त का भाव माना जाता है।
कहा जाता है कि भगवान शिव अत्यंत सरल और भोले हैं। इसलिए उन्हें "भोलेनाथ" कहा जाता है।
समुद्र मंथन और नीलकंठ महादेव भगवान शिव से जुड़ी एक और प्रसिद्ध कथा सोमवार की
शिव पूजा की महिमा को समझने में सहायता करती है
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