श्री सिद्धचक्रमहामंडल विधान विश्वशांति महायज्ञ#श्री सिद्ध चक्र#महामंडल विधान #विश्व शांति महायज्ञ
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• नवपद की आराधना: इसे 'नवपद विधान' भी कहा जाता है क्योंकि इसमें नौ पदों— सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, धर्म, ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप की आराधना व पूजा की जाती है।
• अर्ध एवं मंत्र: इस विधान में सिद्ध भगवान के अष्ट गुणों के अर्घ्य, सोलह कारण भावनाएं, चौंसठ ऋद्धियां, जिनगुण संपत्ति, कर्मदहन और पंचपरमेष्ठी के अर्घ्य के साथ-साथ मंत्रों और बीजाक्षरों की स्थापना की जाती है।
• विश्व शांति महायज्ञ: इस अनुष्ठान का समापन आमतौर पर संपूर्ण सृष्टि में शांति, सदभाव और कल्याण की भावना के साथ 'विश्व शांति महायज्ञ' के रूप में होता है।
• आध्यात्मिक लाभ: इस आराधना से आत्मा की शुद्धि, मानसिक शांति और कर्मों की निर्जरा होती है तथा जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है।
क्या आप इस विधान की पूजा विधि, नियम या अपने निकट किसी आगामी आयोजन के बारे में जानना चाहते हैं?
श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ |
श्री सिद्धचक्र विधान जैन धर्म का एक महान आध्यात्मिक अनुष्ठान है, जो ...
सिद्धचक्र विधान जैन धर्म का एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली विधान है। इसे नवपद विधान भी कहा जाता है क्योंकि इसमें नौ पदों (सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, धर्म, ज...
सिद्धचक्र महामंडल विधान का विश्व शांति महायज्ञ के साथ समापन - Patrika
यह महायज्ञ शांति की कामना में सहायक होगा। यह बात विलोक सागर महाराज ने सिद्ध चक्र महामंडल विधान की अंतिम कड़ी में पाश्र्वनाथ जिनालय में आयोजित विश्व शांति महायज्
सिद्ध चक्र महामंडल विधान की महिमा और लाभ क्या हैं?
सिद्धचक्र विधान में अनेक प्रकार के मंत्र और बीजाक्षरों की स्थापना की जाती है. सिद्धचक्र विधान में सिद्ध भगवान की पूजा की जाती है. सिद्धचक्र विधान में समस्त ...
श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान, रचनाकार - आचार्य गुप्तिनंदी
इस विधान में सिद्धों के अष्ट गुणों के अर्घ्य, सोलह कारण के अर्ध, चौंसठ ऋद्धियों के अर्घ जिनगुण संपत्ति, कर्मदहन, पंचपरमेष्ठी आदि के अर्ध के साथ सहस्त्रनामावली क...