लिंगाष्टकम् | Lingashtakam With Lyrics | Shiv Stotram | ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगम्
Om Shiv Dhun
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लिंगाष्टकम् | Lingashtakam With Lyrics | Shiv Stotram | ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगम्
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🔱 ब्रह्म मुरारि सुरार्चित लिङ्गं... तत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् 🔱
शिवलिंग के सामने शांत मन से बैठकर जब यह स्तोत्र सुना जाता है, तो मन अपने आप भोलेनाथ के चरणों में झुक जाता है। श्रद्धा से सुनें और भक्ति में लीन हों।
🎵 इस वीडियो में:
संपूर्ण लिंगाष्टकम् (8 श्लोक + फलश्रुति) का पाठ, चार अलग-अलग शांत धुनों में
महिला स्वर में भक्तिमय गायन, तानपुरा, वीणा, हारमोनियम, मृदंग, बाँसुरी और मंदिर की घंटियों के साथ
पूरे संस्कृत बोल (Lyrics) स्क्रीन पर
🕉️ लिंगाष्टकम् के बारे में:
लिंगाष्टकम् भगवान शिव के लिंग स्वरूप की स्तुति में रचा गया एक प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र है, जिसे परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य से जोड़ा जाता है। इसके आठ श्लोकों में शिवलिंग की महिमा गाई गई है, और हर श्लोक "तत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्" पर समाप्त होता है। परंपरागत मान्यता के अनुसार भक्त शिव पूजा और अभिषेक के समय इसका पाठ करते आए हैं।
🙏 कब सुनें:
🌅 सुबह की पूजा
🛕 शिव अभिषेक और सोमवार की पूजा
🌙 संध्या आरती के समय
🧘 शांत मन से ध्यान के लिए
📖 पूरे बोल (Lyrics):
ब्रह्म मुरारि सुरार्चित लिङ्गं, निर्मल भासित शोभित लिङ्गम्।
जन्मज दुःख विनाशक लिङ्गं, तत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥१॥
देव मुनि प्रवरार्चित लिङ्गं, कामदहं करुणाकर लिङ्गम्।
रावण दर्प विनाशन लिङ्गं, तत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥२॥
सर्व सुगन्धि सुलेपित लिङ्गं, बुद्धि विवर्धन कारण लिङ्गम्।
सिद्ध सुरासुर वन्दित लिङ्गं, तत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥३॥
कनक महामणि भूषित लिङ्गं, फणिपति वेष्टित शोभित लिङ्गम्।
दक्ष सुयज्ञ विनाशन लिङ्गं, तत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥४॥
कुङ्कुम चन्दन लेपित लिङ्गं, पङ्कज हार सुशोभित लिङ्गम्।
सञ्चित पाप विनाशन लिङ्गं, तत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥५॥
देवगणार्चित सेवित लिङ्गं, भावैर् भक्तिभिरेव च लिङ्गम्।
दिनकर कोटि प्रभाकर लिङ्गं, तत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥६॥
अष्टदलोपरि वेष्टित लिङ्गं, सर्व समुद्भव कारण लिङ्गम्।
अष्ट दरिद्र विनाशित लिङ्गं, तत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥७॥
सुरगुरु सुरवर पूजित लिङ्गं, सुरवन पुष्प सदार्चित लिङ्गम्।
परात्परं परमात्मक लिङ्गं, तत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥८॥
लिङ्गाष्टकम् इदं पुण्यं, यः पठेत् शिव सन्निधौ।
शिवलोकम् अवाप्नोति, शिवेन सह मोदते॥
ℹ️ यह पारंपरिक संस्कृत स्तोत्र है (सार्वजनिक भक्ति परंपरा)। शब्द पढ़ने में आसानी के लिए अलग-अलग लिखे गए हैं। ऑडियो AI की सहायता से बनाया गया है।
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यह वीडियो श्रद्धा और भक्ति के लिए है। इसमें किसी चमत्कारिक, चिकित्सकीय या वित्तीय लाभ का दावा नहीं किया गया है।
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