Перейти к содержимому

भाग 8 | गीत गोविन्द | हिंदी भावार्थ | षष्ठम अष्टपदी - सखी हे केशि मथनमुदारम् | जयदेव जी

Vraja Madhuri

0:00 / 0:00

भाग 8 | गीत गोविन्द | हिंदी भावार्थ | षष्ठम अष्टपदी - सखी हे केशि मथनमुदारम् | जयदेव जी

1 451 просмотр · Трансляция закончилась 2 г. назад
Vraja Madhuri
5,71 тыс. подписчиков
1 451 просмотр · Трансляция закончилась 2 г. назад
गीत गोविंद एक प्राचीन संस्कृत काव्य है जो राधा-कृष्ण के अद्वितीय प्रेम की और विरह वेदना का अनुपम चित्रण करने वाला अनुपम काव्य है। इस काव्य में श्रीजयदेव ने राधा-कृष्ण के आध्यात्मिक सम्बन्ध के अनुभव को संगीत, रस, और रोमांच से व्यक्त किया है। गीत गोविंद के माधुर्यपूर्ण शब्द, संगीत, और भावों की मधुरता से, यह काव्य राधा-कृष्ण के प्रेम के आद्यात्मिक अनुभव को व्यक्त करता है। इसमें राधा का कृष्ण से वियोग की पीड़ा का वर्णन है। गीत गोविन्द रसोपासना के मूल ग्रंथों में से है | यह जगन्नाथ जी को अति प्रिय है और उन्हें गाकर उपासक को सुनाना चाहिए | इस प्लेलिस्ट में गुरु माँ गीत गोविन्द के गूढ़ भाव को व्यक्त कर और राधा कृष्ण के प्रेम की विरह वेदना का मार्मिक और वर्णन कर रही हैं | ____________ जगन्नाथाष्टकं कदाचित् कालिन्दी तट विपिन सङ्गीत तरलो मुदाभीरी नारी वदन कमला स्वाद मधुपः रमा शम्भु ब्रह्मामरपति गणेशार्चित पदो जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥१॥ भुजे सव्ये वेणुं शिरसि शिखिपिच्छं कटितटे दुकूलं नेत्रान्ते सहचर-कटाक्षं विदधते । सदा श्रीमद्‍-वृन्दावन-वसति-लीला-परिचयो जगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥२॥ महाम्भोधेस्तीरे कनक रुचिरे नील शिखरे वसन् प्रासादान्तः सहज बलभद्रेण बलिना । सुभद्रा मध्यस्थः सकलसुर सेवावसरदो जगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥३॥ कृपा पारावारः सजल जलद श्रेणिरुचिरो रमा वाणी रामः स्फुरद् अमल पङ्केरुहमुखः । सुरेन्द्रैर् आराध्यः श्रुतिगण शिखा गीत चरितो जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥४॥ रथारूढो गच्छन् पथि मिलित भूदेव पटलैः स्तुति प्रादुर्भावम् प्रतिपदमुपाकर्ण्य सदयः । दया सिन्धुर्बन्धुः सकल जगतां सिन्धु सुतया जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥५॥ परंब्रह्मापीड़ः कुवलय-दलोत्‍फुल्ल-नयनो निवासी नीलाद्रौ निहित-चरणोऽनन्त-शिरसि । रसानन्दी राधा-सरस-वपुरालिङ्गन-सुखो जगन्नाथः स्वामी नयन-पथगामी भवतु मे ॥६॥ न वै याचे राज्यं न च कनक माणिक्य विभवं न याचेऽहं रम्यां सकल जन काम्यां वरवधूम् । सदा काले काले प्रमथ पतिना गीतचरितो जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥७॥ हर त्वं संसारं द्रुततरम् असारं सुरपते हर त्वं पापानां विततिम् अपरां यादवपते । अहो दीनेऽनाथे निहित चरणो निश्चितमिदं जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥८॥ जगन्नाथाष्टकं पुन्यं यः पठेत् प्रयतः शुचिः । सर्वपाप विशुद्धात्मा विष्णुलोकं स गच्छति ॥९॥ __________________ निभृतनिकुञ्जगृहं गतया निशि रहसि निलीय वसन्तम् । चकितविलोकितसकलदिशा रतिरभसरसेन हसन्तम् ॥ सखि हे केशिमथनमुदारं रमय मया सह मदनमनोरथभावितया सविकारम् ॥ १॥ प्रथमसमागमलज्जितया पटुचाटुशतैरनुकूलम् । मृदुमधुरस्मितभाषितया शिथिलीकृतजधनदुकूलम् ॥ २॥ सखि हे किसलयशयननिवेशितया चिरमुरसि ममैव शयानम् । कृतपरिरम्भणचुम्बनया परिरभ्य कृताधरपानम् ॥ ३॥ सखि हे अलसनिमीलितलोचनया पुलकावलिललितकपोलम् । श्रमजलसकलकलेवरया वरमदनमदादतिलोलम् ॥ ४॥ सखि हे कोकिलकलरवकूजितया जितमनसिजतन्त्रविचारम् । श्लथकुसुमाकुलकुन्तलया नखलिखितघनस्तनभारम् ॥ ५॥ सखि हे चरणरणितमणिनूपुरया परिपूरितसुरतवितानम् । मुखरविशृङ्खलमेखलया सकचग्रहचुम्बनदानम् ॥ ६॥ सखि हे रतिसुखसमयरसालसया दरमुकुलितनयनसरोजम् । निःसहनिपतिततनुलतया मधुसूदनमुदितमनोजम् ॥ ७॥ सखि हे श्रीजयदेवभणितमिदमतिशयमधुरिपुनिधुवनशीलम् । सुखमुत्कण्ठितगोपवधूकथितं वितनोतु सलीलम् ॥ ८॥ सखि हे var - राधिकया श्लोकः ॥ हस्तस्रस्तविलासवंशमनृजुभ्रूवल्लिमद्बल्लवी- वृन्दोत्सारिदृगन्तवीक्षितमतिस्वेदार्द्रगण्डस्थलम् । मामुद्वीक्ष्य विलक्षितं स्मितसुधामुग्धाननं कानने गोविन्दं व्रजसुन्दरीगणवृतं पश्यामि हृष्यामि च ॥ १६॥ श्लोकः ॥ दुरालोकस्तोकस्तबकनवकाशोकलतिका- विकासः कासारोपवनपवनोऽपि व्यथयति । अपि भ्राम्यद्भृङ्गीरणितरमणीया न मुकुल- प्रसूतिश्चूतानां सखि शिखरिणीयं सुखयति ॥ १७॥ श्लोकः ॥ साकूतस्मितमाकुलाकुलगलद्धम्मिल्लमुल्लासित- भ्रूवल्लीकमलीकदर्शितभुजामूलार्द्धपृष्ठस्तनम् । गोपीनां निभृतं निरीक्ष्य गमिताकाङ्क्षश्चिरं चिन्तय- न्नन्तर्मुग्द्धमनोहरो हरतु वः क्लेशं न वः केशवः ॥ १८॥ __________________ 0:00 - जगन्नाथष्टकम और मंगलाचरण 5:50 - गीत गोविन्द की महिमा 08:42 - श्रीमद्भागवत का श्लोक 11:53 - षष्टम गीत भूमिका 14:54 - गीत आरम्भ 23:27 - गीत अर्थ 25:10 - श्री कृष्ण का उदार स्वाभाव 26:30 - श्री कृष्ण वृन्दावन के कामदेव 49:00 - उपसंहार 53:20 - विरह के तीन भाव 59:30 - श्री कृष्ण का प्रेम केवल राधा के लिए ही है __________________ 📽️ PLAYLISTS 📽️ श्रीहित चौरासी :    • श्री हित चौरासी जी | श्री हित हरिवंश जी वाणी   राधा रस सुधा निधी :    • Shri Radha Ras Sudha Nidhi   Glories of Vrindavan English:    • Vrindavan Mahimamrita ENGLISH   वृन्दावन महिमामृत हिंदी भावार्थ:    • वृन्दावन महिमामृत | Vrindavan Mahimamrita ...   विष्णु Sahasranama English meanings:    • Vishnu Sahasranam   विष्णु सहस्त्रनाम हिंदी भावार्थ:    • विष्णु सहस्त्रनाम   ______________ ☎️ CONTACT DETAILS ☎️ 1) Mail ID: smitavenkatesh108@gmail.com 2) Instagram ID:   / smitavenkatesh.108   3) Whatsapp channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaEb... 4) Official Website: https://smitavenkatesh.com/ 5) Medium blog:   / smitavenkatesh   Hare Krishna! _________________ #GeetGovind #GeetGovindinHindi #GeetGovindKeBhaw #GeetGovindBySmitaVenkatesh #GeetGovind ashtpadi #गीतगोविन्द #गीतगोविन्दहिंदीभावार्थ