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साढू लोग बहुत सताइन हमका #अवधी कविता

janisar poetry

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साढू लोग बहुत सताइन हमका #अवधी कविता

458 239 просмотров · 4 года назад
janisar poetry
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458 239 просмотров · 4 года назад
दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है यह कविता अपने साडू से सताए एक व्यक्ति की है जिसकी नई नई शादी हुई है और उसके 5 बड़े साडू है जो आए दिन उसको तंग करते हैं