Mohammad Ki Beti Madine Me Roi | Zuhair Akbarpuri | Ayyam E Fatima Noha Jaipur 2025 | New Noha 2025
Azadari Chitora и Azadari Chitora 2.0
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Mohammad Ki Beti Madine Me Roi | Zuhair Akbarpuri | Ayyam E Fatima Noha Jaipur 2025 | New Noha 2025
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Mohammad Ki Beti Madine Me Roi | Zuhair Akbarpuri | Ayyam E Fatima Noha Jaipur 2025 | New Noha 2025 | Aza E Fatima #JAUPUR 2025/1447
1nd Majlis | New Noha Shahadat Bibi Fatima Zehra 2025/1447 | Ayyam E Fatima Noha 2025 Jaipur
ایام فاطمیه مجلس
Khamsa Majlis On Ayyam E Fatima Jaipur, Rajsthan | Shahadat Bibi Fatima Zahra (s.a)
Reciter: Zuhair Akbarpuri
Organizer: Momneen E Jaipur
Location: Shia Waqf Imambargah, Hakeem Momin Ali, #Jaipur, #Rajsthan
Related to: shahadat hazrat fatima zahra & ayame fatima (s.a) 2025, ayam e fatima Noha 2025
Date: 21 November 2025
Posted by : @AzadariChittora
Contact : +919312305350
लईनो ने ज़हरा को इतना सताया
मोहम्मद की बेटी मदीने मे रोई
तरस ज़ालिमो ने ज़रा भी ना खाया
मोहम्मद की बेटी मदीने मे रोई
उठे जिसकी ताज़ीम को शाहे बतहा
नबी जिसको कहते थे उम्मे अबीहा
वो दिन रात पढ़ते थे जिसका क़सीदा
जिसे जुज़ बताया पयम्बर ने अपना
उसी फातमा पर सितम ऐसा ढाया
मोहम्मद की बेटी मदीने मे रोई
जो पढ़ते थे प्यारे पयम्बर का कलमा
उन्ही ज़ालिमों ने किया ज़ुल्म ऐसा
लगाया यतीमा के रोने पे पहरा
तमाचा नबी की दुलारी को मारा
उठा सर से बाबा का जिस दिन से साया
मोहम्मद की बेटी मदीने में रोई
यतीमी का सदमा रुलाता था हर दम
ना कर पाई बाबा का जी भर के मातम
हुए ज़ुल्म इतने कमर हो गई खम
दिया शाहज़ादी को उम्मत ने ये ग़म
बुला कर के पेशी पे झूठा बताया
मोहम्मद की बेटी मदीने में रोई
बोहोत ज़ुल्म ढाया गया सय्यदा पर
जफा पर जफा कर रहे थे सितमगर
गिराया लईनों ने जलता हुआ दर
तड़पती रही मुस्तफा की गुलेतर
दिले बिन्ते अहमद को बेहद दुखाया
मोहम्मद की बेटी मदीने में रोई
सितम था जमीनों ज़मन रो रहे थे
अली रो रहे थे हसन रो रहे थे
पयम्बर भी ज़ेरे कफ़न रो रहे थे
क़यामत ये थी पंजेतन रो रहे थे
ये दिन आले अहमद पे यसरब में आया
मोहम्मद की बेटी मदीने में रोई
ना भूले अली वो क़यामत का मन्ज़र
लहू दोनों आंखों से बहता था अक्सर
उठाया गया हाथ ज़हरा के ऊपर
यही सोच कर उम्र भर रोए हैदर
मदद फातमा की मैं करने ना पाया
मोहम्मद की बेटी मदीने में रोई
अता कैसे लिखे वो गम वो मुसीबत
यतीमी में ढाई गई थी क़यामत
हुई थी शिकम में पिसर की शहादत
मगर मुर्तज़ा से नही की शिकायत
अली से हर एक दर्द अपना छुपाया
मोहम्मद की बेटी मदीने में रोई
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