लक्ष्मण जागा | Lakshman ji Song |यह गीत लक्ष्मण जी के त्याग, सेवा और शौर्य को समर्पित हैJai Shri Ram
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लक्ष्मण जागा | Lakshman ji Song |यह गीत लक्ष्मण जी के त्याग, सेवा और शौर्य को समर्पित हैJai Shri Ram
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यह गीत लक्ष्मण जी के त्याग, सेवा और शौर्य को समर्पित है — माँ सुमित्रा का आशीर्वाद, उर्मिला का बलिदान, अग्नि-रेखा, मेघनाद से युद्ध, संजीवनी, और सरयू के किनारे का अंतिम क्षण।
This is an original Hindi devotional song about Lakshman: Sumitra's blessing, Urmila's sacrifice, the Lakshman Rekha, the battle with Meghnaad, the Sanjeevani, and the final moment at the Sarayu — told as a modern bhakti rap.
📜 Full Lyrics
⏱️ Chapters
0:02 [Chant]
रामं दशरथं विद्धि, मां विद्धि जनकात्मजाम्।
अयोध्यामटवीं विद्धि, गच्छ तात यथासुखम्॥
0:08
एक भाई... जो चौदह बरस सोया नहीं।
0:26
(जय लक्ष्मण!)
[Beat drop]
0:42
धरती को जो अपने फन पे उठाए,
वो राम के चरणों में शीश झुकाए,
माँ सुमित्रा का लाल, रघुकुल की आन,
राम नाम ही जिसकी साँस, जिसके प्राण।
0:54
राम चले वन को, लक्ष्मण ने छोड़ा घर-बार,
पीछे छूटा महल, छूटा उर्मिला का प्यार,
माँ बोली — "बेटा, राम को पिता मान,
सिया को माँ, और वन को अयोध्या जान!"
1:06
ढोल बजे — धम! धम! धम!
धनुष करे टंकार — टन! टन! टन!
चौदह बरस का पहरा शुरू,
अब जागेगा लक्ष्मण हरदम, हरदम!
1:19
नींद को त्यागा — लक्ष्मण जागा!
महल को त्यागा — लक्ष्मण जागा!
राम के पीछे, पर सबसे आगे,
जब जग सोया — लक्ष्मण जागा!
धनुष उठा के लक्ष्मण आया,
राम का साया, राम का साया!
जय जय लक्ष्मण! (जय जय लक्ष्मण!)
जय सिया राम! (जय सिया राम!)
1:43
निद्रा देवी आई, लक्ष्मण ने रोका,
"चौदह बरस न दूँगा तुझको मौका!"
नींद गई अयोध्या, उर्मिला ने अपनाई,
एक ने जाग के, एक ने सो के सेवा निभाई।
1:55
पर्णकुटी बनाई अपने ही हाथ,
हर रात खड़ा रहा धनुष-बाण के साथ,
मिट्टी पे खींची ऐसी अग्नि-रेखा,
रावण भी काँप उठा, जब उसने वो देखा!
ढोल बजे — धम! धम! धम!
धनुष करे टंकार — टन! टन! टन!
चौदह बरस का पहरा शुरू,
अब जागेगा लक्ष्मण हरदम, हरदम!
2:20
नींद को त्यागा — लक्ष्मण जागा!
महल को त्यागा — लक्ष्मण जागा!
राम के पीछे, पर सबसे आगे,
जब जग सोया — लक्ष्मण जागा!
धनुष उठा के लक्ष्मण आया,
राम का साया, राम का साया!
जय जय लक्ष्मण! (जय जय लक्ष्मण!)
जय सिया राम! (जय सिया राम!)
2:44
ये वही लक्ष्मण, जिसकी गर्जना थी तूफ़ान —
"कह दो तो, गेंद-सा उठा लूँ सारा आसमान,
कच्चे घड़े-सा तोड़ दूँ ये पूरा जहान!"
पर राम का हुक्म न हो, तो न छूटेगा बाण!
2:56
लंका के मैदान में गरजा मेघनाद,
इंद्र को हराने वाला, माया का उस्ताद,
बादलों में छुप के करे वार पे वार,
सामने था लक्ष्मण — एक जागता अंगार!
3:09
चली वीरघातिनी शक्ति, सीने में समाई,
गिरा धरती पे वो, जिसने धरती उठाई!
राम की आँखें भीगीं, आवाज़ भर आई —
"जाग जा मेरे लक्ष्मण, जाग जा मेरे भाई!
धन, भवन, रिश्ते — सब दोबारा मिल जाएँ,
पर ऐसा भाई जग में फिर कभी न पाएँ!"
3:37
पवन-पुत्र उड़ा, पूरा पर्वत उठा लाया,
सुषेण ने संजीवनी का रस पिलाया,
जो चौदह बरस न सोया, उसे कौन सुलाए?
आँख खोले लक्ष्मण — तो लंका थरथराए!
3:40
तन गया धनुष, भड़की प्रलय की ज्वाल,
जो चौदह बरस जागा — वही बना मेघनाद का काल!
एक बाण चला, और गिरा रावण का लाल,
फूल बरसाए देवों ने — ऊँचा रघुकुल का भाल!
3:52
राम ने पूछा — "लक्ष्मण, ये गहने पहचानो?"
बोले — "कुंडल, बाजूबंद... भैया, मैं न जानूँ,
नूपुर पहचानूँ — जिन चरणों में रोज़ शीश झुकाया,
माँ के चरणों से ऊपर, कभी नज़र न उठाया।"
4:13
काल स्वयं आया, द्वार पे लक्ष्मण का पहरा,
दुर्वासा के शाप से अयोध्या पे संकट गहरा,
नगरी बचा के वो चला सरयू के किनारे,
राम के वचन की ख़ातिर अपने प्राण भी वारे।
4:26
लोग कहते हैं वो सो गया... नहीं। लक्ष्मण जाग गया।
जब तक राम का नाम रहेगा...
लक्ष्मण का पहरा रहेगा।
(जय श्री राम!)
[End]
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