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Thodi Raat Thodi Subah | Amit Srivastav | Indra Awasthi

Amit Srivastava

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Thodi Raat Thodi Subah | Amit Srivastav | Indra Awasthi

166 просмотров · 2 недели назад
Amit Srivastava
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रात खिड़की खुली रखी थी कि अगर कुछ गुजरे लम्हे वापस आना चाहे तो आ जाये। दस्तक तो दी शायद उन्होंने और मैं था कि ख्वाब में बाट जोहता रह गया। आने जाने की इस रवायत में लम्हों का एक हिस्सा अटका रह गया खिड़की के कोने में। वो अटका हिस्सा जुगनू सा टिमटिमा रहा अब। "रोशनी को तकसीम करने से जुगनू बन जाते हैं, अब एक जुगनू ही बहुत है अंधेरे से उजाले के लिए।" #थोड़ीरातथोड़ीसुबह